तेहरान। अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों तथा अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकाबंदी को चकमा देकर ईरान ने एक ऐसा दांव खेला है, जिसने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने जनवरी 2025 से एक गुप्त सैन्य नेटवर्क खड़ा कर लिया है। इस सीक्रेट नेटवर्क के माध्यम से तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सभी योजनाओं को विफल कर दिया है। पश्चिमी पाबंदियों के बीच ईरान ने चुपचाप करीब 16,000 करोड़ रुपये के हथियार, खतरनाक विस्फोटक और भारी-भरकम ट्रक जुटा लिए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि यदि नवंबर के बाद संघर्ष आगे बढ़ता है, तो ईरान कमजोर पड़ने के बजाय और भी शक्तिशाली होकर उभरेगा।
पाबंदियों को दरकिनार कर खड़ा किया गुप्त नेटवर्क
एक तरफ जहां ईरान के भीतर महंगाई चरम पर है और आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं तेहरान का यह सीक्रेट ऑपरेशन यह साबित करता है कि वह अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने दशकों से ईरान पर कड़े आर्थिक व सैन्य प्रतिबंध लगा रखे हैं। साथ ही, मध्य पूर्व के समुद्री मार्गों पर अमेरिकी नौसेना की लगातार निगरानी और नाकाबंदी रहती है। इन सभी बाधाओं को पार करने के लिए ईरान ने फर्जी मुखौटा कंपनियों का जाल बिछाया, फर्जी दस्तावेजों की आड़ में हथियार बुक किए और जहाजों की लोकेशन बंद करवाकर (डार्क शिपिंग) माल ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचाया। इसके अलावा पड़ोसी देशों के गुप्त जमीनी रास्तों का इस्तेमाल कर सैन्य साजो-सामान देश के भीतर पहुंचाया गया।
2 अरब डॉलर की खरीदारी से जुटाए मिसाइल पुर्जे और विस्फोटक
जनवरी 2025 से शुरू हुए इस गुप्त आयात अभियान के तहत ईरान ने लगभग 2 अरब डॉलर की बड़ी खरीदारी की है। इसमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले इलेक्ट्रॉनिक व मिसाइल पुर्जे शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रॉकेट, मिसाइल और बारूदी सुरंगें बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन व विस्फोटक तथा युद्ध क्षेत्र में मिसाइल लॉन्चर्स और भारी सामान ढोने वाले शक्तिशाली ट्रकों की बड़ी खेप देश में मंगाई गई है।
पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के लिए बड़ा झटका
यह खुलासा अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय देशों की खुफिया एजेंसियों के लिए एक गंभीर झटका है। ये एजेंसियां लगातार यह दावा कर रही थीं कि उन्होंने ईरान के वित्तीय लेन-देन और जहाजों पर ऐसा शिकंजा कस दिया है कि तेहरान खुले बाजार से हथियार खरीदने में असमर्थ रहेगा। हालांकि, यह घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ईरान आने वाले समय में किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष या युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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