October 28, 2026

सोनिया गांधी की नागरिकता और वोटर लिस्ट का मामला फिर चर्चा में, कोर्ट में कब होगी सुनवाई?

नई दिल्ली। सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने से जुड़े पुराने मामले में दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू अदालत में बुधवार को होने वाली सुनवाई टल गई। वकीलों के काम से दूर रहने और हड़ताल के कारण अदालत इस मामले पर विचार नहीं कर सकी। यह पूरा विवाद वर्ष 1980 का है, जब सोनिया गांधी को अप्रैल 1983 में आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिकता मिलने से पूर्व ही उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाने का आरोप लगाया गया था। अब इस प्रकरण पर आगामी 6 नवंबर को विचार किया जाएगा।

सत्र न्यायालय ने निरस्त किया था निचली अदालत का फैसला

पूर्व में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। इस फैसले के विरोध में याचिकाकर्ता और अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने सेशंस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष जज विशाल गोगने ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया था और याचिका स्वीकार करते हुए मामले को पुनः मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट करेगी मामले की नए सिरे से समीक्षा

विशेष मजिस्ट्रेट विनोद जोशी की अदालत अब इस केस में नए सिरे से आगे की कार्रवाई करेगी। प्रक्रिया के तहत अदालत संबंधित पुलिस अधिकारी से प्रगति रिपोर्ट मांग सकती है और उनका पक्ष जानने के पश्चात् ही अपना अंतिम निर्णय देगी। सेशंस कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि वह स्वयं मजिस्ट्रेट अदालत का स्थान लेकर अंतिम आदेश पारित नहीं कर सकती, इसीलिए फाइल को दोबारा निचली अदालत के पास भेजना कानूनी रूप से आवश्यक था।

पिछले आदेश पर उठे थे गंभीर सवाल

सेशंस कोर्ट ने अपने फैसले में रेखांकित किया था कि पूर्व में मजिस्ट्रेट अदालत ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार दिए ही शिकायत को खारिज कर दिया था। हालांकि शिकायत के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की सत्यता सत्यापित नहीं थी, लेकिन केवल इस वजह से अर्जी को खारिज करना तर्कसंगत नहीं माना गया। इसके अतिरिक्त, पुराने आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं था कि लगाए गए आरोपों से कोई संज्ञेय अपराध घटित होता है अथवा नहीं।

नागरिकता और सरकारी संस्थाओं पर टिप्पणी को बताया अनुचित

अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस पुराने रुख की भी आलोचना की, जिसमें नागरिकता और संवैधानिक निकायों के अधिकार क्षेत्र पर टिप्पणियाँ की गई थीं। विशेष जज के अनुसार, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की भूमिका पर की गई वे बातें अनुचित थीं। अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व आदेश से यह साफ नहीं हो पा रहा था कि मामले की गहन पुलिस जांच की आवश्यकता है या नहीं।

नागरिकता से पहले नाम दर्ज कराने का आरोप

याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का दावा है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता मिलने से काफी पहले ही वोटर लिस्ट में उनका नाम शामिल कर लिया गया था। अर्जी के अनुसार, उनका नाम पहली बार 1980 में मतदाता सूची में दर्ज हुआ, जिसे 1982 में हटा दिया गया और बाद में 1983 में दोबारा शामिल किया गया। याचिका में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर नई दिल्ली स्थित सफदरजंग रोड के पते का उल्लेख किया गया है।