October 27, 2026

बीमार जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए महिला प्रहरी को राहत, कोर्ट ने दी 80 दिन की अतिरिक्त छुट्टी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बिलासपुर केंद्रीय जेल में पदस्थ महिला प्रहरी मंदा तिवारी को उनके गंभीर रूप से अस्वस्थ जुड़वा बच्चों की परवरिश और चिकित्सा देखभाल के लिए 80 दिनों की अतिरिक्त बाल देखभाल छुट्टी (सीसीएल) प्रदान किए जाने का महत्वपूर्ण निर्देश पारित किया है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ द्वारा यह संवेदनशील और न्यायसंगत आदेश सुनाया गया है। अदालत ने बच्चों की कम उम्र और उनकी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर आवश्यकताओं को पूरी तरह से संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता महिला कर्मचारी को यह बड़ी राहत प्रदान की है। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर 120 दिन की बाल देखभाल अवकाश स्वीकृत किए जाने का आग्रह किया था।

कम उम्र के अस्वस्थ जुड़वा बच्चों की देखभाल के लिए लगाई थी गुहार

अदालत में पैरवी के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने जानकारी दी कि मंदा तिवारी की नियुक्ति इसी वर्ष 18 सितंबर को बिलासपुर केंद्रीय जेल में महिला प्रहरी के पद पर हुई थी। उन्होंने पूर्व में 10 सितंबर 2025 को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। वर्तमान में दोनों बच्चे लगभग एक वर्ष के हैं और लगातार अस्वस्थ रहने के कारण उन्हें बार-बार नियमित चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। पूर्व में सक्षम प्राधिकारी द्वारा मात्र 20 दिन का अवकाश स्वीकृत किए जाने के बाद पर्याप्त देखभाल न मिलने पर याचिकाकर्ता को न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी थी।

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा अवकाश नियमों के तहत दी गई राहत

मामлे की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 के नियम 38-ग का हवाला दिया गया। इस विधिक प्रावधान के अंतर्गत महिला शासकीय सेवकों को अपने संपूर्ण सेवाकाल के दौरान अधिकतम 730 दिनों तक की बाल देखभाल छुट्टी प्राप्त करने का अधिकार है, बशर्ते एक कैलेंडर वर्ष में यह अवकाश तीन से अधिक चरणों में न लिया जाए। राज्य शासन की ओर से पूर्व में स्वीकृत 20 दिनों के अवकाश का पक्ष रखा गया, किंतु माननीय न्यायालय ने बच्चों की नाजुक स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करते हुए पूर्व स्वीकृत अवधि को अपर्याप्त करार दिया।

अदालत ने दिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आदेश पालन के निर्देश

न्यायाधीश ने पत्रावलियों पर उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों और बच्चों की आयु का गंभीरता से परीक्षण करने के उपरांत याचिका को स्वीकार कर लिया। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूर्व में स्वीकृत 20 दिनों के अतिरिक्त महिला प्रहरी को 80 दिनों का अतिरिक्त बाल देखभाल अवकाश प्रदान किया जाए। अदालत के इस संवेदनशील निर्णय से प्रसूता महिला कर्मचारी को बड़ी राहत मिली है, जिससे वह अपने बीमार नौनिहालों का उचित उपचार और देखरेख सुनिश्चित कर सकेंगी।