झालरापाटन। कालीसिंध सुपर थर्मल पावर परियोजना की यूनिट संख्या 1 के कूलिंग टावर में सोमवार को मेंटेनेंस वर्क के दौरान अचानक भीषण आग भड़क उठी। देखते ही देखते लपटों ने टावर के अंदर लगी प्लास्टिक की जालियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे परिसर में धुएं का गुबार उठने लगा।
अधिकारियों में मचा हड़कंप, 1 घंटे में पाई आग पर काबू
हादसे की खबर मिलते ही थर्मल पावर प्लांट में अरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही आला अधिकारी और कर्मचारी तुरंत मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। दमकलकर्मियों की करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका।
मेंटेनेंस के चलते 2 महीने से बंद थी यूनिट
गौरतलब है कि कालीसिंध थर्मल प्लांट में 600-600 मेगावाट की कुल दो इकाइयां हैं। इनमें से पहली यूनिट बीते दो महीनों से सालाना मरम्मत कार्य के कारण बंद पड़ी थी। समय पर काम पूरा न होने की वजह से मेंटेनेंस की अवधि बढ़ाई गई थी और इसी दौरान कूलिंग टावर में यह हादसा हो गया। इस घटना में थर्मल पावर स्टेशन को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
जांच के लिए विशेष कमेटी गठित, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
दुर्घटना के बाद प्लांट प्रशासन ने उच्च अधिकारियों की आपात बैठक बुलाकर स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच के अनुसार, वेल्डिंग या मेंटेनेंस के दौरान निकली चिंगारी से प्लास्टिक सामग्री में आग पकड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रबंधन ने मामले की विस्तृत पड़ताल के लिए एक तकनीकी जांच समिति का गठन किया है, जो यह जांच करेगी कि काम के दौरान सुरक्षा नियमों का सही ढंग से पालन किया गया था या नहीं।

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