वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच रणनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी समय ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है, हालांकि उन्होंने दोनों देशों के बीच किसी बड़े कूटनीतिक समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। फ्लोरिडा में मतदान के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हमला बहुत जल्द भी हो सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि दोनों पक्ष किसी ठोस और बेहतर समझौते पर पहुँच जाएँ।
सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत के दोनों विकल्प खुले
ईरान पर संभावित हमले से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि कोई भी देश अपनी भावी सैन्य रणनीतियों का खुलासा पहले से नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए उत्सुक है, परंतु मुख्य प्रश्न यह है कि क्या वह तय शर्तों का ईमानदारी से पालन करेगा। उनके इस वक्तव्य से यह स्पष्ट हो गया है कि वाशिंगटन ने तेहरान के संदर्भ में सैन्य दबाव और वार्ता के द्वार एक साथ खोल रखे हैं।
अमेरिकी सेना की सराहना और ईरान की आर्थिक स्थिति का जिक्र
अपनी सरकार की मध्य पूर्व नीति का बचाव करते हुए ट्रंप ने अमेरिकी सशस्त्र बलों की कार्यकुशलता की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण ईरान के लड़ाकू विमानों और नौसैनिक जहाजों को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे ईरान की सैन्य क्षमता प्रभावित हुई है। इसके साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि ईरान वर्तमान में अभूतपूर्व महंगाई और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
ईरान द्वारा प्रस्ताव की खबरों का खंडन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दे
दूसरी तरफ, ईरानी मीडिया सूत्रों ने उन रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि तेहरान ने मध्यस्थों के माध्यम से कोई नया प्रस्ताव पेश किया है। ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने से जुड़ी खबरों को मनगढ़ंत बताया है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान की उम्मीद जताते हुए कहा कि युद्ध समाप्त होने के पश्चात अमेरिका दोनों राष्ट्रों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करेगा, वहीं उन्होंने अपने देश की आंतरिक राजनीति पर बोलते हुए विपक्षी दल पर भी तीखे आरोप लगाए।

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