October 25, 2026

कश्मीर से अल्पसंख्यकों तक, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का दिया जवाब

न्यू यॉर्क। संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच का दुरुपयोग कर भारत विरोधी दुष्प्रचार फैलाने पर भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कड़ी फटकार लगाई है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी बात रखते हुए भारतीय प्रतिनिधियों ने पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट किया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर भारत का अनविभाज्य एवं अखंड हिस्सा है और रहेगा। इसके साथ ही भारत ने सख्त लहजे में पाकिस्तान को उसके अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को अविलंब खाली करने का निर्देश दिया तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अपनी मजबूत संवैधानिक प्रतिबद्धता को दोहराया।

पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण करने और नागरिकों के कल्याण की सलाह

संयुक्त राष्ट्र महासभा की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारतीय कूटनीतिज्ञों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के अनर्गल बयानों का करारा जवाब दिया। भारत ने कहा कि अपनी सेना के इशारों पर कठपुतली की तरह काम करने के बजाय पाकिस्तान को अपने देश के भीतर झांकना चाहिए और वहां की बदहाल जनता के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधियों ने रेखांकित किया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना किसी भी संप्रभु राष्ट्र का बुनियादी कर्तव्य है। भारत का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार और सुरक्षा देता है, जिससे देश के धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों ने भारत की समग्र प्रगति में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसके विपरीत पाकिस्तान अपने यहां के प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदायों को न्यूनतम सुरक्षा देने में भी पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये का पर्दाफाश

भारतीय राजनयिकों ने विश्व मंच पर अल्पसंख्यकों के मामले में उपदेश देने की कोशिश करने वाले इस्लामाबाद के पाखंड को बेनकाब किया। भारत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि जो देश खुद अपने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों को बढ़ावा देता है, वह दूसरों को नसीहत देने का दुस्साहस कर रहा है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में आतंकवादियों के अधिकारों की वकालत करने वाले दृष्टिकोण और महामारी के दौरान हुए धार्मिक भेदभाव से जुड़े भ्रामक दावों पर भी भारतीय पक्ष ने कड़ा एतराज व्यक्त करते हुए सच्चाई उजागर की।

जलवायु परिवर्तन और न्यायसंगत विकास पर भारत का मजबूत रुख

संयुक्त राष्ट्र के समक्ष भारत ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। भारतीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण सामाजिक समानता, जलवायु न्याय और स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा समर्थित संवैधानिक तंत्र पर आधारित है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से नागरिकों की रक्षा को जीवन व समानता के मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है, जो इस दिशा में देश की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।