October 25, 2026

BRICS बैठक में पश्चिम एशिया के हालात पर विचार-विमर्श, ओम बिरला ने दिया संवाद का संदेश

नई दिल्ली। सोमवार से प्रारंभ हो रहे बारहवें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन में केवल विधायी और तकनीकी विषयों तक ही बातचीत सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम एशिया के वर्तमान संकट जैसे गंभीर भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी गहन मंथन किया जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में दुनिया की संसदों की भी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इन बड़ी चुनौतियों पर संवाद कर शांति और वैश्विक स्थिरता के पक्ष में एक साझा सहमति विकसित करें।

वैश्विक शांति और कूटनीतिक संवाद पर जोर

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि यद्यपि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति मुख्य रूप से राष्ट्र प्रमुखों का विषय होती है, लेकिन जब विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधि और सांसद आपस में विचार-विमर्श करते हैं तो इससे एक सकारात्मक वैश्विक माहौल का निर्माण होता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि विश्वभर में शांति और सौहार्द कायम होने पर ही समावेशी आर्थिक प्रगति को गति दी जा सकती है। हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने विभिन्न देशों के बीच के मतभेदों को पाटने की अपनी कूटनीतिक दक्षता साबित की है, और अब इसी सकारात्मक संवाद को संसदीय मंच के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा।

डिजिटल तकनीक का मानव-केंद्रित उपयोग और शासन सुधार

इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य केंद्र बिंदु 'जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना' रखा गया है। इसके अंतर्गत संस्थागत ढांचों की मजबूती, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तथा डिजिटल तकनीकों के मानव-केंद्रित उपयोग, वैश्विक शासन प्रणाली में आवश्यक सुधार और सतत विकास के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग पूरी जवाबदेही और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ किया जाना अत्यंत आवश्यक है।