नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की कार्यक्षमता और पानी के भीतर रहने की क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा तैयार की जा रही स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक के एनर्जी मॉड्यूल के दूसरे चरण का औपचारिक शुभारंभ गुजरात स्थित एलएंडटी परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन रक्षा सचिव और डीआरडीओ प्रमुख की उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसमें नौसेना के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
पनडुब्बियों की मारक क्षमता में होगा अभूतपूर्व इजाफा
आमतौर पर पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियों को चार्ज करने के लिए बार-बार समुद्र की सतह पर आना पड़ता है, जिससे दुश्मनों के रडार और निगरानी तंत्र की नज़र में आने का जोखिम बढ़ जाता है। डीआरडीओ की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा निर्मित यह स्वदेशी एआईपी सिस्टम पनडुब्बियों को बिना सतह पर आए लंबे समय तक गहराई में काम करने की शक्ति प्रदान करेगा। इस तकनीक के इस्तेमाल से नौसेना की गुप्त अभियानों को अंजाम देने की क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
बिजली उत्पादन और परीक्षण के बाद पनडुब्बी में होगा तैनात
इस महत्वपूर्ण चरण की शुरुआत के बाद अब अगला कदम एनर्जी मॉड्यूल को पूरी तरह क्रियान्वित कर उससे बिजली पैदा करना और नौसेना द्वारा निर्धारित कड़े मानकों पर उसका परीक्षण करना है। सभी परीक्षण सफल रहने के बाद इस मॉड्यूल को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को सौंप दिया जाएगा। योजना के अनुसार, आगामी वर्ष की शुरुआत में इसे कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी में स्थापित कर दिया जाएगा।

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