जयपुर। राजस्थान के नदी-नालों और खनिज समृद्ध ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से बेरोक-टोक जारी अवैध रेत और बजरी खनन के कारोबार पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने राज्य में पसरते अवैध खनन के जाल पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि तमाम प्रशासनिक दिशा-निर्देशों और अदालती फैसलों के बावजूद राज्य में अवैध खनन जारी है और मौजूदा निगरानी तंत्र इसे रोकने में नाकाम साबित हुआ है। न्यायाधिकरण ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को पूर्व में जारी की गई पर्यावरण सुरक्षा गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत कड़ाई से पालन कराने के आदेश दिए हैं।
न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) और जिला स्तरीय प्राधिकरण (DEIAA) की वर्तमान मॉनिटरिंग व्यवस्था को अपर्याप्त करार दिया। पीठ ने निर्देश दिए हैं कि रेत व बजरी खनन की पारदर्शी और प्रभावी निगरानी के लिए एक विशेष और संशोधित तंत्र तुरंत स्थापित किया जाए।
पुराने आदेशों और गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन अनिवार्य
न्यायाधिकरण ने अपने 5 अप्रैल 2019 के आदेश का हवाला देते हुए सरकार को याद दिलाया कि अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट, विस्तृत खनन योजना, पुनर्भरण अध्ययन और पर्यावरण मंजूरी की शर्तों का पालन होना जरूरी है। इसके साथ ही एनजीटी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी 'सस्टेनेबल सैंड माइनिंग गाइडलाइंस, 2016' और 'एनफोर्समेंट एंड मॉनिटरिंग गाइडलाइंस फॉर सैंड माइनिंग, 2020' में बताए गए सभी सुरक्षा उपायों को राज्य में धरातल पर लागू किया जाए।
अवैध खनन पर शिकंजा कसने के लिए जारी किए पांच निर्देश
एनजीटी ने पर्यावरण की क्षति रोकने और खनन माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं:
अवैध खनन और परिवहन में लिप्त वाहनों और मशीनों को तुरंत जब्त कर पर्यावरणीय क्षति मुआवजे की वसूली तेज की जाए। रेत व बजरी के वास्तविक खनन की मात्रा का सटीक आकलन करने के लिए ड्रोन और जीआईएस (GIS) तकनीक का उपयोग किया जाए।
जिस क्षेत्र में अधिकारियों की लापरवाही से अवैध खनन पाया जाएगा, वहां संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। दर्ज एफआईआर मामलों में पर्यावरण को पहुंचे नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कर जुर्माना वसूला जाए और खनिजों की बिक्री-खरीद की निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल और नियमित पर्यावरण लेखा परीक्षा कराई जाए।
नदी घाटियों को बचाने की कवायद होगी तेज
बनास, लूनी और चंबल जैसी प्रमुख नदी घाटियों में अवैध बजरी खनन लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बना हुआ है। एनजीटी द्वारा अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के आदेश के बाद अब पुलिस, खान विभाग और जिला प्रशासन पर कड़े कदम उठाने का दबाव रहेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन होने पर नदियों के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा की जा सकेगी।

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