भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत और आंकड़ों में विरोधाभास को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी हकीकत सुधारने के बजाय कागजी आंकड़ों की बाजीगरी कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है, जिससे स्कूली बच्चों की सुरक्षा दांव पर लग गई है।
आंकड़ों के खेल और पांच महीने के अंतराल पर सवाल
कमलनाथ ने सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से सरकार को घेरते हुए कहा कि फरवरी 2026 में विधानसभा के पटल पर सरकार ने खुद यह स्वीकार किया था कि प्रदेश में 5,735 सरकारी स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं। इसके विपरीत, महज पांच महीने बाद जुलाई 2026 में सरकार की ओर से यह दावा कर दिया गया कि राज्य में एक भी स्कूल भवन जर्जर नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कुछ ही महीनों में ऐसा क्या चमत्कार हो गया कि हजारों जर्जर स्कूल अचानक सुरक्षित हो गए।
विभाग के रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर
मीडिया रिपोर्ट्स और राज्य शिक्षा केंद्र के आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि आज भी प्रदेश के 5,770 स्कूलों में नए भवनों के निर्माण, बड़ी मरम्मत या शौचालयों की सख्त आवश्यकता है, जो फरवरी के आंकड़ों से 35 अधिक है। सीहोर और बैतूल सहित कई जिलों के स्कूलों में छतों व फर्श पर दरारें, दीवारों में सीलन और बरसात के दौरान पानी टपकने जैसी गंभीर समस्याएं बनी हुई हैं। हालांकि, सरकार का तर्क है कि वर्ष 2026-27 के दौरान 840 नए स्कूल भवनों को स्वीकृति दी गई है तथा पिछले दो वर्षों में 230 भवनों की मरम्मत और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण को भी मंजूरी प्रदान की गई है। कांग्रेस नेता ने मांग की है कि आंकड़ों के मायाजाल से बाहर निकलकर स्कूलों की वास्तविक स्थिति सुधारी जाए ताकि बच्चों की जान जोखिम में न पड़े।

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