October 19, 2026

हाजिरी ठीक करने के लिए मांगे पैसे, लोकायुक्त के जाल में फंसा नगर निगम का सुपरवाइजर

सतना। मध्य प्रदेश में सरकारी महकमों में फैलते भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर लगाम कसने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो लगातार सख्त कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में सतना जिले के लोकायुक्त रीवा संभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए नगर निगम के एक सुपरवाइजर को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धर दबोचा है। आरोपी सुपरवाइजर द्वारा एक गरीब सफाईकर्मी की उपस्थिति पंजिका (हाजिरी) पूरी दर्ज करने के एवज में अवैध वसूली की जा रही थी, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

सफाईकर्मी से हाजिरी पूरी करने के नाम पर मांग रहा था घूस

लोकायुक्त पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सतना नगर निगम के वार्ड क्रमांक 15 में कार्यरत सफाईकर्मी राजकिशोर समुंद्रे ने पिछले महीने कुल 25 दिन ईमानदारी से अपनी सेवाएं दी थीं, किंतु आधिकारिक रजिस्टर में उसकी उपस्थिति कम दर्शाई गई थी। जब पीड़ित सफाईकर्मी ने अपनी हाजिरी दुरुस्त कराने के लिए क्षेत्र के सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी से संपर्क किया, तो आरोपी ने उपस्थिति पूरी दर्ज करने की एवज में उससे तीन हजार रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की। गरीब कर्मचारी द्वारा असमर्थता जताए जाने के बावजूद आरोपी अपनी जिद पर अड़ा रहा, जिसके बाद तंग आकर पीड़ित ने रीवा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई।

लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस

शिकायत मिलते ही पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त योगेश्वर शर्मा के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का सत्यापन कराया गया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि आरोपी सुपरवाइजर पहले ही बतौर पहली किस्त एक हजार रुपये ऐंठ चुका था। इसके पश्चात, रीवा लोकायुक्त टीम ने सुनियोजित तरीके से बिरला अस्पताल के सामने ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी बालकृष्ण आदिवासी को शिकायतकर्ता से दो हजार रुपये की शेष रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। लोकायुक्त टीम ने भ्रष्ट अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन अधिनियम, 2018) की सुसंगत धारा 7 के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।