टोक्यो। जापान जैसे अत्यधिक भूकंप प्रभावित देश में, जहां मात्र कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी हजारों लोगों की अमूल्य जान बचा सकती है, एक त्रुटिपूर्ण अलर्ट ने आधुनिक तकनीक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। रूस के क्षेत्र में आए एक भूकंप को लेकर जापान की स्वचालित निगरानी प्रणाली ने इतनी विकराल तीव्रता का आकलन कर लिया कि पूरे देश में अफरा-तफरा का माहौल बन गया और लोग संभावित आपदा के प्रति सतर्क हो गए। हालांकि, गनीमत यह रही कि चेतावनी समय रहते वापस ले ली गई, लेकिन इस तकनीकी चूक ने देश के वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों को आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है।
स्वचालित प्रणाली ने बताई 9.9 की भयावह तीव्रता
आज यानी शुक्रवार, सोलह अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार दोपहर लगभग बारह बजकर छत्तीस मिनट पर जापान की स्वचालित भूकंप चेतावनी प्रणाली ने एक असाधारण और विनाशकारी भूकंप आने का संकेत प्रसारित किया। शुरुआती तकनीकी आकलन में इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 9.9 आंकी गई, जो कि अत्यंत भयावह स्थिति को दर्शाती है। देश भर के नागरिकों के मोबाइल फोन तथा सार्वजनिक आपातकालीन चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से यह अलर्ट तेजी से प्रसारित हुआ, जिससे कई क्षेत्रों में लोग संभावित खतरे को भांपते हुए पूरी तरह चौकन्ने हो गए।
बारह मिनट बाद वापस ली गई चेतावनी
हालांकि, यह शुरुआती अनुमान पूरी तरह भ्रामक और असत्य साबित हुआ। जापान के मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए प्राप्त आंकड़ों का सूक्ष्मता से पुनरीक्षण किया और लगभग बारह मिनट के भीतर ही इस आपदा चेतावनी को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया। इसके तुरंत पश्चात यह स्पष्ट किया गया कि इस घटना से देश में सुनामी का कोई भी खतरा उत्पन्न नहीं हुआ है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इस संपूर्ण घटनाक्रम ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि किस प्रकार कुछ ही मिनटों का गलत तकनीकी आकलन बड़े पैमाने पर जनमानस में भारी मानसिक तनाव और चिंता का कारण बन सकता है।

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