October 15, 2026

तेल संकट से निपटने के लिए एशियाई देशों की योजना, मिलकर बनाएंगे आपातकालीन भंडार

मनीला। पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव और आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं के बीच एशियाई देशों ने एकजुट होकर आपातकालीन तेल भंडार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 'एशिया जीरो एमिशन कम्युनिटी' (AZEC) की मंत्रिस्तरीय बैठक में जापान के नेतृत्व में सदस्य देशों ने तेल सुरक्षा को मजबूत करने की संयुक्त कार्ययोजना पर सहमति व्यक्त की है।

आपातकालीन तेल भंडार और रणनीतिक सहयोग

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य संकट के समय तेल भंडारण ढांचे का साझा उपयोग करना और बाजार की अस्थिरता को रोकने के लिए मिलकर रणनीतिक भंडार से ईंधन जारी करना है। इस नई रणनीति के तहत एशियाई देश आपातकालीन तेल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अपने क्षेत्रीय सहयोग को भी निरंतर आगे बढ़ाएंगे। जापान की इस पहल का मुख्य ध्येय आपात स्थितियों में सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आपूर्ति के झटकों से सुरक्षित रखना है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा

वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस समय दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई हैं। भारत, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई देशों के लिए इस समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट से वैश्विक परिवहन लागत और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। संभावित खतरों से निपटने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर बनाए रखने के लिए एशियाई देशों द्वारा मिलकर आपातकालीन तेल भंडार बनाना एक दूरदर्शी और रक्षात्मक कदम है।