लंदन। ब्रिटेन से उत्तरी साइप्रस में मेडिकल टूरिज्म के तहत आईवीएफ (IVF) उपचार के लिए जाने वाले कम से कम 30 परिवारों के साथ एक बड़ा और गंभीर धोखा सामने आया है। इन परिवारों ने अपने बच्चों के लिए यूरोपीय देशों के डोनर्स का चयन किया था, लेकिन डीएनए टेस्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बच्चों का आनुवंशिक स्रोत (जेनेटिक सोर्स) तुर्किये और अरब देशों के लोगों से मिल रहा है।
फर्जी डोनर्स और अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी
यह सनसनीखेज धोखाधड़ी तब उजागर हुई जब 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि वे उन स्पर्म-एग डोनर्स के बिल्कुल नहीं हैं, जिन्हें उनके माता-पिता ने बेहद सावधानी के साथ चुना था। माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों के पूरी तरह से जांचे-परखे और स्वस्थ डोनर्स का विकल्प चुना था। खोजी रिपोर्टों के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय फर्जीवाड़े के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से जुड़े हुए हैं।
ब्लैकलिस्टेड क्लिनिक का झूठा विज्ञापन
दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने साल 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और कभी वहां स्पर्म की कोई आपूर्ति नहीं की। इसके बावजूद, यह क्लिनिक वर्षों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन प्रकाशित कर संतान चाहने वाले सीधे-साधे जोड़ों को ठगता रहा। डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर माता-पिता द्वारा किया गया यह चुनाव बच्चों के मानवाधिकारों से जुड़ा था, ताकि 18 वर्ष की आयु होने पर वे अपने जैविक मूल (बायोलॉजिकल रूट्स) को जान सकें। फर्जी डोनर्स के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का सीधा हनन हुआ है।
उत्तरी साइप्रस बना जोखिम भरा गंतव्य
ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी ने इस पूरे मामले को 30 से अधिक बच्चों के मामलों में एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी करार दिया है। उत्तरी साइप्रस, जो तुर्किये के कब्जे में है, अपने बेहद लचर कानूनों के कारण आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए एक लोकप्रिय लेकिन बेहद जोखिम भरा केंद्र बनता जा रहा है। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाज सस्ता होने के कारण हर साल 5 हजार से 8 हजार विदेशी जोड़े यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने यहां के क्लिनिकों में आईवीएफ कराया है, जिनमें ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की संख्या सबसे अधिक है।

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