October 14, 2026

हिंसा से सुरक्षा और न्याय तक-महिलाओं का संबल बना सखी वन स्टॉप सेंटर

रायपुर :  हिंसा और प्रताड़ना से प्रभावित महिलाओं को संकट की घड़ी में त्वरित सहायता और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में सखी वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के इन केंद्रों के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर आश्रय, परामर्श, कानूनी सहायता, उपचार और पुलिस सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। बालोद जिले का सखी वन स्टॉप सेंटर इस एकीकृत सहायता व्यवस्था का उदाहरण है।

केंद्र प्रशासक एकता कुर्रे ने बताया कि घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, बाल विवाह अथवा किसी अन्य प्रकार की हिंसा से प्रभावित महिलाएं किसी भी समय केंद्र से संपर्क कर सकती हैं। केंद्र का उद्देश्य उन्हें तत्काल राहत देने के साथ आगे की कार्रवाई और पुनर्वास में सहयोग करना है।

सुरक्षित आश्रय से लेकर कानूनी सहायता तक

जरूरतमंद महिलाओं को केंद्र में पांच दिनों तक निःशुल्क अस्थायी आश्रय, भोजन और देखभाल की सुविधा दी जाती है। प्रशिक्षित काउंसलर उन्हें मानसिक तनाव से उबरने के लिए परामर्श देते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समन्वय से निःशुल्क कानूनी सलाह और पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। अस्वस्थ या घायल महिलाओं को चिकित्सकीय उपचार तथा आपात स्थिति में पुलिस सहायता भी दिलाई जाती है।

महिलाओं के लिए सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण

केंद्र में प्रशासक से लेकर सुरक्षा गार्ड तक महिला कर्मचारी तैनात हैं। इससे सहायता लेने पहुंची महिलाएं बिना संकोच अपनी बात साझा कर सकती हैं। उनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है, ताकि वे सुरक्षित महसूस करते हुए सहायता प्राप्त कर सकें।

छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 42 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए शासन संकटग्रस्त महिलाओं तक सहायता सेवाएं पहुंचा रहा है। सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन 181 के माध्यम से पीड़ित महिलाएं 24 घंटे मदद प्राप्त कर सकती हैं।