नई दिल्ली: पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आंदोलनों का दौर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। चाहे वह नीट पेपर लीक के विरोध में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोनम वांगचुक का अनशन हो, अभिजीत दीपके का आंदोलन हो, अथवा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुआ हालिया प्रदर्शन—इन सभी घटनाओं में युवाओं का तीव्र आक्रोश और उनकी मुखर अभिव्यक्ति ने सबका ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे आंदोलनों के इस दौर में बिहार की माटी में जन्मी एक महान सामाजिक-राजनीतिक हस्ती का स्मरण होना अत्यंत स्वाभाविक है। दशकों पहले जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था, तब देश की राजनीति में एक भूचाल आ गया था। आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी निडर और मुखर आवाज को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसके साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी जेपी के अदम्य साहस और उनके विचारों को रेखांकित किया है।
कौन थे 'लोकनायक' जयप्रकाश नारायण?
जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के छपरा जिले के सिताबदियारा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हरसूदयाल श्रीवास्तव और माता का नाम फूलरानी देवी था। सिताबदियारा गांव गंगा और घाघरा नदियों के संगम के समीप स्थित है, जिसकी सीमाएं बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों से मिलती हैं। बचपन से ही मेधावी और अध्ययनशील रहे जेपी आगे चलकर एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रमुख समाजवादी विचारक और जननेता के रूप में उभरे। उनकी राजनीति का मुख्य उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में व्यवस्थागत बदलाव लाना था। वर्ष 1974 में बिहार से शुरू हुए छात्र आंदोलन और देश में आपातकाल के विरोध में उनके नेतृत्व ने उन्हें पूरे देश में एक नई पहचान दिलाई। जनता के भारी समर्थन और उनके ऐतिहासिक संघर्ष के कारण ही उन्हें आदर से 'लोकनायक' कहा जाने लगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेपी को किया नमन, कहा- 'हर पीढ़ी पर रहा उनका गहरा प्रभाव'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को नमन करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व हर पीढ़ी के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "उन्होंने देशवासियों को यह अटूट विश्वास दिलाया कि सार्वजनिक जीवन राष्ट्र के नवनिर्माण का सबसे प्रभावी जरिया बन सकता है। देश में आपातकाल के काले दौर के दौरान उनकी निडर और बेबाक आवाज अत्यंत उल्लेखनीय थी। लोकनायक जेपी सुशासन सुनिश्चित करने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचने के लिए हमेशा समर्पित रहते थे। 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हुए हम उनके आदर्शों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- 'सत्ता से बड़ा होता है राष्ट्रहित'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जेपी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "उनका 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान राजनीति में शुचिता, शासन में जवाबदेही और समाज में नैतिक पुनर्जागरण का एक बड़ा संकल्प था। आपातकाल के उस काले अध्याय में उन्होंने अदम्य साहस के साथ तानाशाही का पुरजोर विरोध किया।"
उन्होंने आगे कहा, "भारतीय संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जेपी द्वारा किया गया संघर्ष देश के इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। लोकनायक का जीवन हमें यह सीख देता है कि किसी भी पद या सत्ता से बड़ा कोई सिद्धांत नहीं होता और व्यक्तिगत हित से हमेशा सर्वोपरि राष्ट्रहित होता है।"
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने दी श्रद्धांजलि, कहा- 'जनशक्ति में था अटूट विश्वास'
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा, "भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में जयप्रकाश नारायण (जेपी) का नाम साहस, सिद्धांतों और जनशक्ति पर अटूट विश्वास के साथ हमेशा याद किया जाएगा। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी से लेकर स्वतंत्र भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तक, उनका हर कदम अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प का प्रतीक रहा।"
ओम बिरला ने अपने संदेश में आगे कहा, "सर्वोदय और भूदान जैसे आंदोलनों से जुड़कर उन्होंने समाज के सबसे कमजोर वर्ग के उत्थान और सामाजिक समानता के विचार को देशव्यापी बनाया। लोकनायक के उच्च विचार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति उनकी निष्ठा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।"

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