भोपाल: मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, इसके बावजूद प्रदेश में मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। राज्य के उत्तरी हिस्से में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के प्रभाव से ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, दिन के वक्त तेज धूप खिलने के कारण गर्मी का अहसास हो रहा है, जबकि रात के समय पारे में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इंदौर में इस दौरान न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे कम रहा। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा, शनिवार को भी सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी जिलों में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश दर्ज की गई। हालांकि, आगामी 13 और 14 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहने का अनुमान है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में संभावित कम दबाव के क्षेत्र के असर से 15 अक्टूबर के बाद राज्य में एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
दिन में तेज धूप और गर्मी, तो रातों में महसूस होने लगी ठंडक
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इस समय मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। दिन के समय कई शहरों में अधिकतम तापमान अभी भी 36 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बना हुआ है, जिसके कारण तीखी धूप का सामना करना पड़ रहा है। इसके विपरीत, रात होते ही तापमान में तेजी से गिरावट आ रही है, जिससे हल्की सिहरन महसूस होने लगी है।
प्रमुख शहरों के न्यूनतम तापमान पर नजर डालें तो इंदौर में 16 डिग्री, अमरकंटक में 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री तथा कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके उलट, बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन जैसे शहरों में दिन का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर बना रहा। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक दिन में धूप और रात में हल्की ठंडक का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा।
अक्टूबर माह में क्यों बदल रहा है मौसम का मिजाज?
यद्यपि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही मध्य प्रदेश से विदा हो चुका है, किंतु लगातार सक्रिय हो रही विभिन्न मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश की गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं हैं। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले एक दशक के मौसम संबंधी आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि अक्टूबर के महीने में गर्मी, बारिश और ठंड—तीनों तरह के मौसम का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है। इस बार भी महीने की शुरुआत सुहावनी धूप के साथ हुई है, जबकि रात के पारे में लगातार गिरावट आ रही है।
मानसून सीजन में सामान्य से चार प्रतिशत कम हुई कुल बारिश
चालू वर्ष में जून से लेकर सितंबर माह के चार महीनों के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर (यानी लगभग 35.8 इंच) औसत बारिश दर्ज की गई। राज्य की दीर्घावधि सामान्य वर्षा का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर (लगभग 37.3 इंच) है। इस प्रकार, पूरे मानसून सीजन के दौरान सामान्य से लगभग चार प्रतिशत कम पानी गिरा।
पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच बारिश के आंकड़ों में भी स्पष्ट अंतर देखा गया:
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पूर्वी मध्य प्रदेश: इस हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
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पश्चिमी मध्य प्रदेश: इस क्षेत्र में सामान्य के मुकाबले 12 प्रतिशत की कमी आई।
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प्रदेश के कुल 25 जिलों में इस बार बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। विशेष रूप से पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, धार, झाबुआ, इंदौर, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, उज्जैन और शाजापुर सहित कई जिलों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर यह कमी 20 प्रतिशत से भी अधिक रही।
जून की कम बारिश ने बिगाड़ा पूरे सीजन का अंतिम गणित
मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, मानसून की शुरुआत यानी जून के महीने में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। हालांकि, जुलाई के शुरुआती हफ्तों में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार जरूर हुआ, लेकिन उसके बाद मानसून दो बार कमजोर पड़ गया, जिससे बारिश की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। सीजन के अंतिम सप्ताह में कुछ मजबूत सिस्टम जरूर सक्रिय हुए, लेकिन जून के महीने में हुई शुरुआती कमी की भरपाई वे पूरी तरह नहीं कर पाए। जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में वर्षा के आंकड़ों में सुधार तो हुआ, लेकिन शुरुआती अंतर पूरे सीजन के कुल औसत पर बना रहा। इस प्रकार, इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश में लगभग 100 दिनों तक सक्रिय रहने के बाद अंततः सामान्य से 4% कम बारिश के साथ विदा हुआ।

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