October 9, 2026

ईशान की वापसी से वैभव की दावेदारी तक, संजू सैमसन के लिए आसान नहीं ओपनिंग की राह

नई दिल्ली: भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन का खराब फॉर्म लगातार चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है। टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन करके भारत को अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी के दम पर खिताब दिलाने वाले संजू सैमसन इसके बाद से बल्ले से निरंतर संघर्ष करते हुए नजर आए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भी वह महज 11 रन बनाकर आउट हो गए। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप के बाद भारत के लिए खेली गई अपनी पिछली 11 पारियों में 5, 0, 1, 27, 10, 57, 50, 9, 7, 2 और 11 रन बनाए हैं। इसका मतलब यह है कि इन 11 पारियों में वह केवल दो बार ही अर्धशतक तक पहुँच सके हैं, जबकि छह पारियों में वह दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए।

टी20 विश्व कप में रहे थे भारत के सबसे बड़े हीरो

सैमसन की यह मौजूदा फॉर्म इसलिए भी बेहद हैरान करने वाली है, क्योंकि टी20 विश्व कप के दौरान उन्होंने भारत की लगातार दूसरी खिताबी जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और करो या मरो वाले मुकाबले में नाबाद 97 रनों की शानदार पारी खेली थी। इसके बाद सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रनों की धमाकेदार पारी खेली थी। इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए संजू सैमसन को टूर्नामेंट का 'सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी' (मैन ऑफ द टूर्नामेंट) चुना गया था। इस स्तर के प्रदर्शन के बाद किसी भी खिलाड़ी को लंबा मौका दिया जाना बिल्कुल स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन भारतीय टीम में सलामी बल्लेबाज के स्थान के लिए बढ़ती कड़ी प्रतिस्पर्धा ने संजू सैमसन की स्थिति को थोड़ा मुश्किल जरूर कर दिया है।

अभिषेक शर्मा की जगह पक्की, अन्य खिलाड़ियों के बीच मुकाबला

अभिषेक शर्मा फिलहाल बतौर सलामी बल्लेबाज अपनी जगह अंतिम एकादश में पूरी तरह मजबूत कर चुके हैं। ऐसे में दूसरी सलामी जोड़ी के स्थान के लिए यशस्वी जायसवाल और युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। भारत के पूर्व टेस्ट बल्लेबाज हनुमा विहारी का मानना है कि टीम के भीतर मची यह बढ़ती प्रतिस्पर्धा सीधे तौर पर संजू सैमसन पर अतिरिक्त दबाव डालती है और इसका साफ असर उनके मैदान पर प्रदर्शन में भी दिखाई देता है। विहारी ने ईशान किशन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब ईशान ने इसी साल जनवरी के महीने में भारतीय टीम में दोबारा वापसी की थी और लगातार रन बनाने शुरू किए थे, तब भी संजू सैमसन के प्रदर्शन में भारी गिरावट देखने को मिली थी।

'प्रतिस्पर्धा होने पर खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं सैमसन'

पूर्व बल्लेबाज हनुमा विहारी ने अपने यूट्यूब चैनल पर चर्चा करते हुए कहा कि संजू सैमसन का मौजूदा फॉर्म इस समय भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर संजू सैमसन के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और चाहते हैं कि उन्हें भारतीय टीम में लगातार खेलना जारी रखना चाहिए, क्योंकि वह विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रह चुके हैं।

विहारी के मुताबिक, विश्व कप से ठीक पहले जब ईशान किशन की भारतीय टीम में वापसी हुई थी, तब संजू सैमसन ने खुद एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान यह बात कही थी कि टीम के अंदर प्रतिस्पर्धा होने पर वह मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं और इसका नकारात्मक असर उनके खेल पर पड़ता है। अब वैभव सूर्यवंशी के रूप में एक और बेहद मजबूत युवा दावेदार सामने आ चुका है। हालांकि वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 मैच में सूर्यवंशी को अंतिम एकादश (प्लेइंग-11) में मौका नहीं मिला, लेकिन उनकी टीम में मौजूदगी ही संजू सैमसन पर बड़ा दबाव बढ़ाने के लिए काफी है।

दबाव से निपटना हर खिलाड़ी के लिए जरूरी

हनुमा विहारी ने आगे कहा कि क्रिकेट या जीवन के किसी भी खेल में दबाव एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। खासकर जब कोई खिलाड़ी भारत जैसी बड़ी टीम के लिए मैदान पर उतरता है और करोड़ों देशवासियों की उम्मीदें उस पर टिकी होती हैं, तो वह दबाव और अधिक बढ़ जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को इस तरह के दबाव से निपटना अच्छी तरह सीखना चाहिए। उनके अनुसार, टीम में प्रतिस्पर्धा हो या न हो, देश के लिए खेलने वाले किसी भी पेशेवर खिलाड़ी पर दबाव होना बिल्कुल स्वाभाविक है और उसे अपने शानदार प्रदर्शन के जरिए ही इस बात का करारा जवाब देना चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या संजू सैमसन अपनी इस खराब फॉर्म से जल्द बाहर निकलकर वापसी कर पाएंगे, या फिर यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों की बढ़ती दावेदारी उनके लिए और अधिक मुश्किलें खड़ी कर देगी?