आगामी वनडे विश्व कप 2027 का विस्तृत कार्यक्रम घोषित किया जा चुका है और इसके साथ ही इस प्रतिष्ठित वैश्विक टूर्नामेंट का काउंटडाउन भी आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। अगले वर्ष यह बहुप्रतीक्षित विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप में अपने अभियान का आगाज आगामी 7 अक्टूबर को गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले से करेगी। हालांकि, इस मेगा टूर्नामेंट से पहले टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं के सामने भारतीय टीम के संयोजन को लेकर कई बड़े सवाल खड़े हैं, जिनका समाधान वक्त रहते खोजना बेहद जरूरी है।
विश्व कप में भारतीय टीम का पूरा कार्यक्रम
भारतीय टीम वनडे विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत 7 अक्टूबर को गत चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ करेगी। यह रोमांचक मुकाबला केप टाउन में खेला जाएगा। इसके पश्चात, 10 अक्टूबर को जोहानिसबर्ग में भारत का मुकाबला अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ होगा। इसके बाद भारतीय टीम 14 अक्टूबर को अफगानिस्तान से, 17 अक्टूबर को क्वालिफायर-ए टीम से और ग्रुप चरण के अपने अंतिम मुकाबले में 24 अक्टूबर को सह-मेजबान जिम्बाब्वे की टीम का सामना करेगी। आइए अब नजर डालते हैं कि वर्तमान में भारतीय टीम के सामने क्या-क्या प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं…
एक अदद बैकअप ओपनर की अब तक तैयारी नहीं
वनडे विश्व कप 2027 में शुभमन गिल और रोहित शर्मा पारी की शुरुआत करेंगे, यह बात अब लगभग तय नजर आ रही है, लेकिन यदि इन दोनों अनुभवी बल्लेबाजों में से कोई एक भी चोटिल हो जाता है, तो भारत के पास अब तक कोई पुख्ता बैकअप ओपनर तैयार नहीं है। युवा यशस्वी जायसवाल को लगातार वनडे टीम में चुना तो जाता है, लेकिन उन्हें अधिकांश समय बेंच पर ही बैठना पड़ता है। यशस्वी ने अपने अब तक के वनडे करियर में कुल छह मैच खेले हैं, जबकि इस वर्ष उन्हें मात्र दो ही एकदिवसीय मैच खेलने का अवसर मिला है। यदि टीम मैनेजमेंट ईशान किशन को बतौर विकल्प देख रहा है, तो उन्होंने भी वर्ष 2026 में केवल पांच ही वनडे मैच खेले हैं। इसके अलावा, वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में समाप्त हुई सीरीज में भी यशस्वी को प्लेइंग-11 में मौका नहीं दिया गया था।
मध्य क्रम का संयोजन भी बना हुआ है बड़ी चुनौती
भारतीय टीम के सामने मध्यक्रम का संयोजन भी एक बड़ी और पेचीदा चुनौती के रूप में नजर आ रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज के दौरान ईशान किशन को एक मैच में नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया था, तो वहीं दूसरे मुकाबले में श्रेयस अय्यर को इस स्थान पर उतारा गया था। अनुभवी केएल राहुल की बल्लेबाजी स्थिति (बैटिंग पोजीशन) में भी लगातार फेरबदल किए गए हैं। कई बार खिलाड़ियों के चोटिल होने के कारण टीम प्रबंधन को मजबूरन संयोजन में बदलाव करने पड़े हैं। भारत को वनडे विश्व कप के शुरू होने से पहले अब केवल 11 वनडे मैच और एशिया कप ही खेलना है, ऐसे में यह तय करना बेहद जरूरी है कि मुख्य मध्यक्रम का संयोजन आखिर क्या होगा। इसके अलावा, निचला क्रम भी चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि वाशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल का हालिया प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक प्रभावशाली नहीं रहा है।
टीम में दूसरा प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाज कौन होगा?
वनडे विश्व कप 2027 में भारत के लिए विकेटकीपिंग की मुख्य जिम्मेदारी संभालने के सबसे प्रबल दावेदार केएल राहुल हैं। केएल राहुल आमतौर पर एकदिवसीय क्रिकेट में विकेट के पीछे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते आए हैं। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका की मुश्किल पिचों पर राहुल के लिए विकेटकीपिंग करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। ऋषभ पंत को लगातार टीम से बाहर रखकर यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि वह शायद वर्तमान में टीम की दीर्घकालिक योजनाओं में फिट नहीं बैठ रहे हैं। दूसरी ओर, ईशान किशन को बतौर विकेटकीपर वनडे मैचों में अब तक पर्याप्त मौके नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि टीम में दूसरा मुख्य विकेटकीपर किसे चुना जाता है।
तेज गेंदबाजी आक्रमण की स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं
दक्षिण अफ्रीका की विशिष्ट परिस्थितियों और पिचों पर तेज गेंदबाजों की भूमिका बेहद निर्णायक साबित होगी। हालांकि, विश्व कप के लिए भारतीय टीम का मुख्य पेस (तेज गेंदबाजी) अटैक क्या होगा, इसको लेकर अभी तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रमुख गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने पिछले वनडे विश्व कप के बाद से लेकर अब तक केवल दो ही एकदिवसीय मुकाबले खेले हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुई वनडे सीरीज में भी बुमराह को टीम में शामिल नहीं किया गया था। वहीं, कुछ नए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका जरूर दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि टीम प्रबंधन विश्व कप के मद्देनजर युवा प्रतिभाओं को भी तैयार कर रहा है।
दूसरी तरफ, प्रसिद्ध कृष्णा का बार-बार चोटिल होना टीम प्रबंधन के लिए गहरी चिंता का विषय है। अर्शदीप सिंह टी20 प्रारूप की तरह वनडे क्रिकेट में उतने अधिक असरदार नजर नहीं आए हैं। गुरनूर बरार को तीसरे तेज विकल्प के रूप में आजमाया जा रहा है, लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ हालिया सीरीज में वह काफी महंगे साबित हुए थे। इसके अलावा, हर्षित राणा भी इन दिनों लगातार चोटों से जूझते दिखाई दिए हैं। बैकअप तेज गेंदबाजों के रूप में मोहम्मद सिराज और अंशुल कंबोज भी कोई विशेष और प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सके हैं। भुवनेश्वर कुमार की टी20 टीम में वापसी के बाद अब यह देखना भी बाकी है कि क्या मोहम्मद शमी की वनडे टीम में दोबारा वापसी हो पाती है या नहीं। कुल मिलाकर, भारत के सामने इस समय चयन की एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिसे लेकर चयनकर्ताओं को जल्द ही अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

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