दिल्ली-एनसीआर: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पेट्रोल और डीजल वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाने की व्यापक तैयारी शुरू कर दी गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने तथा आने वाले आगामी वर्षों में पेट्रोल-डीजल वाहनों की नई बिक्री पर चरणबद्ध तरीके से पूर्ण रोक लगाने की जोरदार सिफारिश की है।
इस रिपोर्ट में नई निजी कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की हिस्सेदारी को लगातार बढ़ाने का ठोस प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत वर्ष 2027 तक नई बिकने वाली कुल कारों में 20 प्रतिशत, वर्ष 2028 तक 45 प्रतिशत और वर्ष 2029 तक 70 प्रतिशत कारें इलेक्ट्रिक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके पश्चात आगामी 1 जनवरी 2031 से दिल्ली-एनसीआर में नई पेट्रोल और डीजल निजी कारों की बिक्री पूरी तरह से बंद करने तथा केवल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की ही आधिकारिक अनुमति दिए जाने की सिफारिश की गई है।
वाहन श्रेणियों के अनुसार चरणबद्ध बदलाव का प्रस्ताव
समिति ने इस बदलाव को केवल निजी कारों तक ही सीमित रखने का सुझाव नहीं दिया है, बल्कि विभिन्न व्यावसायिक और सार्वजनिक वाहनों के लिए भी सख्त समयसीमा तय की है। प्रस्ताव के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 से नए ऑटो रिक्शा, दोपहिया टैक्सी, डिलीवरी वाहन और हल्के मालवाहक वाहनों का नया पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी में ही किए जाने की सिफारिश है। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से नई कैब-टैक्सी, बस और गैर-परिवहन दोपहिया वाहनों को भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा, मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों को भी वर्ष 2031-32 तक चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की योजना सुझाई गई है।
पुराने वाहनों के संचालन पर भी सख्ती
प्रदूषण के स्तर को तेजी से कम करने के लिए पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले पेट्रोल-डीजल वाहनों को भी धीरे-धीरे सड़कों से हटाने का प्रस्ताव है। समिति ने विशेष रूप से बीएस-1 (BS-I), बीएस-2 (BS-II) और बीएस-3 (BS-III) श्रेणी के वाहनों को पूरी तरह हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही बीएस-4 (BS-IV) वाहनों को भी वर्ष 2030 तक चरणबद्ध तरीके से सड़क से बाहर करने का प्रस्ताव है। सर्दियों के मौसम में जब प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है, उस दौरान बीएस-4 वाहनों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का सुझाव भी दिया गया है। वहीं, बीएस-6 दोपहिया वाहनों को वर्ष 2035 तक और चार पहिया वाहनों को वर्ष 2040 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश की गई है।
घर पर चार्जर लगाने के नियम होंगे आसान और मिलेगी आर्थिक मदद
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए चार्जिंग की सुविधा को बेहद आसान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की एनओसी की अनिवार्यता को खत्म करने का प्रस्ताव है, जिससे लोग अपनी सोसायटी में तय पार्किंग की जगह पर आसानी से ईवी चार्जर लगा सकें। इसके लिए केवल संबंधित आरडब्ल्यूए को लिखित सूचना देना ही पर्याप्त होगा। इसके अलावा, बिजली वितरण कंपनियों को भी ईवी चार्जिंग के लिए नया कनेक्शन आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर कनेक्शन जारी करने की सिफारिश की गई है।
आम नागरिकों को पेट्रोल-डीजल वाहनों को छोड़कर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करने के लिए आकर्षक आर्थिक प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करवाकर नई इलेक्ट्रिक कार या टैक्सी खरीदने की स्थिति में एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि और एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्क्रैपेज बोनस दिए जाने की सिफारिश की गई है। इसी प्रकार, इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर 50,000 रुपये और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर 30,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखा गया है।
वर्ष 2028 तक दिल्ली की सड़कों पर दौड़ेंगी हजारों नई इलेक्ट्रिक बसें
दिल्ली में अधिक से अधिक नागरिकों तक बेहतर सार्वजनिक परिवहन पहुंचाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रदेश सरकार की बड़ी संख्या में आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने की योजना है। वर्ष 2028 तक दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में कुल 6,972 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल कर ली जाएंगी। इसी अक्टूबर माह तक 150 नई ई-बसों सहित दिसंबर 2026 तक कुल 842 ई-बसें डीटीसी के बेड़े में शामिल हो रही हैं। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का एक सबसे बड़ा कारण सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों का भारी दबाव है, इसलिए प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को दिल्ली के कोने-कोने तक पहुंचाने की पुख्ता तैयारी है।
वर्तमान समय में दिल्ली परिवहन निगम की कुल 6,858 बसें दिल्ली की सड़कों पर सुचारू रूप से दौड़ रही हैं। इनमें से 1,750 सीएनजी बसें हैं, जबकि शेष 5,088 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। अब आगामी तीन वर्षों के भीतर डीटीसी के बेड़े में 6,972 नई ई-बसें शामिल करने की विस्तृत योजना बनाई गई है। इसके तहत वर्ष 2026 के दिसंबर तक 842 इलेक्ट्रिक बसें प्राप्त होंगी, वर्ष 2027 में 2,800 इलेक्ट्रिक बसों का बड़ा बेड़ा शामिल होगा, और वर्ष 2028 में 3,330 नई इलेक्ट्रिक बसें बेड़े का हिस्सा बनेंगी।
इनमें विभिन्न आकार की बसें शामिल होंगी:
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12 मीटर लंबी बसें: वर्ष 2028 तक दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में शामिल होने वाली कुल बसों में 2,508 बसें 12 मीटर लंबाई की होंगी। इनमें वर्ष 2026 के दौरान 608 बसें, वर्ष 2027 में 1,400 बसें और वर्ष 2028 में 500 बसें मिलेंगी।
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7 मीटर लंबी ई-बसें (संकरे रास्तों के लिए): दिल्ली की चौड़ी सड़कों पर जहां बड़ी 12 मीटर की बसें चलेंगी, वहीं कम चौड़ाई वाले और घनी आबादी वाले संकरे रास्तों के लिए 7 मीटर लंबाई वाली 500 विशेष ई-बसें चलाई जाएंगी।
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9 मीटर लंबी ई-बसें: राजधानी में सबसे बड़ी संख्या में 9 मीटर लंबाई वाली नई ई-बसों को लाने की योजना है। इसके तहत वर्ष 2026 में 234 बसें, वर्ष 2027 में 1,400 बसें और वर्ष 2028 में 2,330 बसें प्राप्त होंगी। दिसंबर 2028 तक कुल 3,964 ई-बसें 9 मीटर लंबाई की होंगी।
दिल्ली-एनसीआर में नए ऑटो होंगे पूरी तरह इलेक्ट्रिक, सीएनजी की होगी विदाई
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को प्रभावी रूप से कम करने के लिए अब ऑटो और मालवाहक तिपहिया वाहनों को भी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोड पर लाने की तैयारी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की विशेषज्ञ समिति ने नए तिपहिया वाहनों के पंजीकरण को लेकर चरणबद्ध रूप से और अधिक सख्ती बरतने की सिफारिश की है। इसके तहत आने वाले वर्षों में नए सीएनजी, पेट्रोल और डीजल तिपहिया वाहनों का पंजीकरण पूरी तरह बंद कर केवल इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-लोडर को ही आधिकारिक मंजूरी दिए जाने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से नए तिपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी के अंतर्गत ही किया जाएगा। इसके बाद एनसीआर के अधिक वाहन घनत्व वाले प्रमुख जिलों—जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर—में 1 जनवरी 2028 से केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का ही पंजीकरण किया जाएगा। एनसीआर के शेष अन्य जिलों में इस व्यवस्था को 1 जनवरी 2029 से लागू करने का प्रस्ताव है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि इसके पश्चात पूरे एनसीआर क्षेत्र में नए सीएनजी और पेट्रोल-डीजल तिपहिया वाहनों के पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुराने डीजल तिपहिया वाहनों को लेकर पहले से ही सख्त नियम लागू हैं, जिसके तहत ऐसे वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक सड़कों से पूरी तरह हटाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
सीएनजी को नहीं माना गया प्रदूषण का पूर्ण समाधान
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सीएनजी वाहन पारंपरिक पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में प्रत्यक्ष रूप से कम धुआं छोड़ते हैं, परंतु इनके इंजनों के संचालन से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) का उत्सर्जन होता है। यह हानिकारक गैस वायुमंडल में मौजूद अन्य तत्वों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके बेहद सूक्ष्म कणों का निर्माण करती है, जिन्हें 'सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर' कहा जाता है, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।

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