बीकानेर। राजस्थान सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीपीएन) के प्रथम चरण के किसानों को बड़ी राहत देते हुए क्षतिग्रस्त हो चुके खालों के पुनर्निर्माण की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। दशकों पुराने और जर्जर हो चुके इन खालों के कारण टेल-एंड (अंतिम छोर) के किसानों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पा रहा था, जिसे अब दुरुस्त किया जा रहा है।
इंदिरा गांधी नहर के खालों के जीर्णोद्धार का बड़ा निर्णय
बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब साठ साल पहले बनाए गए खाले समय के साथ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे। रखरखाव के अभाव और निरंतर उपयोग के चलते कई स्थानों पर फील्ड लाइनें टूट गई थीं और गहरे गड्ढे बन गए थे। इसके कारण खेतों तक पानी पहुंचने से पहले ही अत्यधिक रिसाव हो जाता था और पानी की भारी बर्बादी होती थी। किसानों की इस पुरानी समस्या और क्षेत्र में बढ़ रहे वाटर लॉसेस को देखते हुए राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए 790 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है।
सात पैकेजों में बंटा पुनर्निर्माण कार्य और सिंचाई क्षेत्र का विस्तार
जल संसाधन विभाग उत्तर हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता अरुण कुमार सिडाना के अनुसार इस संपूर्ण कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सात अलग-अलग पैकेज बनाए गए हैं और सात कार्यों को औपचारिक स्वीकृति दी जा चुकी है। अधिकारियों का दावा है कि इस पुनर्निर्माण प्रक्रिया के मुकम्मल होने के बाद क्षेत्र के लगभग 1 लाख 51 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर किसानों को सीधा और सुगम लाभ प्राप्त होगा। फील्ड लाइनिंग के मजबूत होने से अब पानी का अनावश्यक अपव्यय रुकेगा और अंतिम छोर पर बैठे किसानों को भी उनके हिस्से का पूरा पानी मिल सकेगा।
एनडीबी प्रोजेक्ट से पहले मिल चुकी है बड़ी राहत
इससे पूर्व न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के वित्तीय सहयोग से राजस्थान जल क्षेत्र पुनर्संरचना परियोजना के अंतर्गत भी क्षेत्र को महत्वपूर्ण राहत मिल चुकी है। इस 3291.63 करोड़ रुपए की बड़ी परियोजना के तहत हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और बीकानेर जिलों के अंतर्गत आने वाली इंदिरा गांधी फीडर, मुख्य नहर तथा उसकी विभिन्न वितरण प्रणालियों की लंबी दूरी में रिलाइनिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस आधुनिक सुधार कार्य से जल संग्रहण और वितरण प्रणाली में सुधार हुआ है।
पश्चिमी राजस्थान के तेरह जिलों की जीवनरेखा है यह परियोजना
जल संसाधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम और द्वितीय चरणों के माध्यम से कुल 16.17 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। यह परियोजना मात्र सिंचाई का साधन नहीं, अपितु पश्चिमी राजस्थान के तेरह प्रमुख जिलों यथा हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी, चूरू, जोधपुर, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा और बाड़मेर में निवास करने वाली लगभग दो करोड़ आबादी के लिए पेयजल की प्रमुख जीवनरेखा है। इसके अतिरिक्त सूरतगढ़, रामगढ़, गिरल, गुढ़ा, बरसिंगसर और राजवेस्ट जैसी महत्वपूर्ण थर्मल एवं गैस आधारित ऊर्जा परियोजनाओं को भी विद्युत उत्पादन के लिए इसी विशाल नहर तंत्र से निरंतर जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। इन नए खालों के निर्माण से संपूर्ण जल वितरण तंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा किसानों को वर्षों पुरानी समस्या से स्थायी मुक्ति मिलेगी।

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