October 6, 2026

यूपी-बिहार की चुनावी व्यवस्था पर शिवराज का निशाना, बोले- मतपेटियां लूटकर डलवाए जाते थे वोट

भोपाल। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्षी दलों पर कड़ा और तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को सिरे से खारिज करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इसे हास्यास्पद बताया और कहा कि विपक्ष अपनी चुनावी हार की बौखलाहट और खीज मिटाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल दबाव बना रहा है।

बैलेट पेपर की मांग पर तीखा पलटवार

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के माध्यम से विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए तंज कसा कि विपक्ष की मांग का मतलब देश को उस काले दौर में वापस ले जाना है, जब 1980 और 1990 के दशक में बिहार तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में खुलेआम मतपेटियां लूट ली जाती थीं और ताकतवर लोग गरीबों की जगह फर्जी तरीके से वोट डालते थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्ष देश को उसी बूथ कैप्चरिंग और अराजकता के दौर में दोबारा धकेलना चाहता है।

एसआईआर और चुनावी सुधारों का पुरजोर समर्थन

चुनाव आयोग द्वारा फर्जी और अयोग्य मतदाताओं को बाहर करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि एसआईआर (SIR) जैसी प्रक्रियाएं चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में बेहद जरूरी सुधार का हिस्सा हैं। इसके जरिए मतदाता सूचियों से मृत, दो जगहों पर दर्ज नाम और स्थाई रूप से जगह छोड़ चुके लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक सवाल किया कि यदि मतदाता सूची ही साफ-सुथरी और पारदर्शी नहीं होगी, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो सकेंगे? उन्होंने विपक्ष की उस मांग पर भी सवाल उठाए जिसमें एसआईआर को रद्द करने की बात कही जा रही है, और पूछा कि क्या विपक्ष यह चाहता है कि गड़बड़ियों से भरी पुरानी सूचियों पर ही हमेशा चुनाव होते रहें।

कांग्रेस के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार

कांग्रेस पार्टी पर तीखा कटाक्ष करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों का चरित्र पूरी तरह से अवसरवादी और दोहरे मापदंड वाला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश या झारखंड जैसे राज्यों में चुनाव परिणाम उनके पक्ष में आते हैं और सरकारें बनती हैं, तब तो वे इसे जनता का पवित्र 'जनादेश' करार देते हैं, लेकिन जहां हार मिलती है, तुरंत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदाता सूचियों में खोट निकालने लगते हैं। उन्होंने विपक्षी दलों को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले और जनादेश का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि सुधार का रास्ता हमेशा आगे की ओर ले जाता है न कि पीछे की ओर।