नई दिल्ली| पिछले माह हुए 'सीजेपी' (CJP) प्रदर्शन से कड़ा सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने इस बार केवल जंतर-मंतर मुख्य प्रदर्शन स्थल को ही नहीं, बल्कि वहाँ तक पहुँचने वाली हर छोटी-बड़ी राह और मार्ग को पूरी तरह से घेर लिया था। शुक्रवार को जंतर-मंतर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का अभेद घेरा तैनात किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के 11 प्रमुख स्टेशन बंद रखे गए तथा लुटियंस दिल्ली की तरफ आने वाले सभी प्रमुख रास्तों पर पुलिस ने पूछताछ और सख्त निगरानी बढ़ा दी। इस पुख्ता रणनीति का परिणाम यह रहा कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत मुख्य प्रदर्शन स्थल पर होने के बजाय वहाँ तक पहुँचने वाले रास्तों पर ही शुरू हो गई।
पिछले अनुभवों से सबक और बदली हुई रणनीति
बीते 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर से जुड़े केवल पाँच मेट्रो स्टेशन ही बंद किए गए थे। लेकिन 22 जुलाई को बिगड़ते हालातों को देखते हुए दोपहर करीब 11:30 बजे अचानक 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद कराना पड़ा था और सड़कों पर भी आवाजाही काफी बाधित हुई थी। बाद में सुरक्षा से जुड़े उच्चाधिकारियों ने इसे एक रणनीतिक चूक माना था। इसी बात से सीख लेते हुए इस बार दिल्ली पुलिस ने पहले से ही पूरी तरह मोर्चा संभाल लिया था।
प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि पूरी राह बनी सुरक्षा की पहली दीवार
पुलिस प्रशासन ने गत बृहस्पतिवार से ही जंतर-मंतर से जुड़े सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से ही कुल 11 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए गए थे। इसका सबसे बड़ा असर दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस को जंतर-मंतर से जोड़ने वाली 'यलो लाइन' पर देखने को मिला।
केवल मेट्रो ही नहीं, बल्कि सड़क मार्ग से आवागमन भी आसान नहीं रखा गया था। आईटीओ, दिल्ली गेट, आरके आश्रम, तालकटोरा, मथुरा रोड और आईएनए समेत लुटियंस दिल्ली की ओर आने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। इसके साथ ही, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में शुक्रवार सुबह से ही इंटरनेट सेवाएँ भी प्रभावित कर दी गईं, ताकि प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संपर्क और भीड़ जुटाने की कोशिशों को समय रहते रोका जा सके।
भीड़ को एकजुट होने से पहले ही तितर-बितर करने पर जोर
इस बार पुलिस की रणनीति में सबसे बड़ा और प्रभावी बदलाव यह रहा कि भीड़ को एक बड़ा हुजूम बनने देने के बजाय उसे शुरुआती स्तर पर ही छोटे-छोटे समूहों में रोक लिया जाए। पिछली बार बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एक ही जगह एकत्र हो जाने के बाद पुलिस को भारी मशक्कत से भीड़ नियंत्रित करनी पड़ी थी। इस बार पुलिस ने छोटे समूहों को रास्ते में ही रोककर उन्हें अलग करने पर पूरा जोर दिया।
राजनीतिक रंग और विपक्षी दलों की भूमिका
इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा पहले के आयोजनों की तुलना में अधिक राजनीतिक था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की प्रमुख माँग रखी गई थी। प्रदर्शन की घोषणा के साथ ही पहले दिन से आम आदमी पार्टी (AAP) और वामदलों की सक्रियता साफ नजर आई। हालांकि, आम लोगों की भागीदारी पर इसका आंशिक असर पड़ा और पूरा विपक्ष एक साझा मंच पर नजर नहीं आया। चुनाव आयोग को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों का रुख एक जैसा होने के बावजूद कांग्रेस इस पूरे प्रदर्शन से पूरी तरह दूर रही।
गृह मंत्री अमित शाह की उच्चस्तरीय प्लानिंग और एआई का उपयोग
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को रोकने की माँग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों एवं छात्र संगठनों ने शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई के हिंसक प्रदर्शनों से सीख लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और सुझावों पर पूरी तत्परता से काम किया। अतीत के आंदोलनों के ट्रेंड्स का सूक्ष्म अध्ययन किया गया, खुफिया एजेंसी IB के इनपुट जुटाए गए और नई दिल्ली क्षेत्र के लिए एक उन्नत एडवांस प्लानिंग तैयार की गई।
केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने पूर्व में राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के दौरान यह स्पष्ट किया था कि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की सबसे पहली शर्त मजबूत आंतरिक सुरक्षा है। उन्होंने युवा आईपीएस अधिकारियों से CCTNS, ICJS, NETGRID और NAFIS जैसे आधुनिक प्लेटफार्मों के इंटीग्रेटेड डेटा बैंक का उपयोग करने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए डेटा विश्लेषण कर कार्रवाई योग्य इंटेलिजेंस विकसित करने की अपील की थी। इसी का परिणाम रहा कि दिल्ली पुलिस ने संभावित भीड़, रूट और ट्रांसपोर्ट साधनों का पहले ही आकलन कर शांतिपूर्ण ढंग से स्थिति को संभाल लिया।
खुफिया एजेंसियों और साइबर यूनिट की कड़ी निगरानी
खुफिया एजेंसी IB के मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) द्वारा सोशल मीडिया गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर रखी गई। दिल्ली-एनसीआर के सभी प्रमुख मार्गों की वीडियोग्राफी कराई गई तथा विदेशी फंडिंग एवं बाहरी मदद के स्रोतों की भी जाँच की गई। इसके अलावा, विभिन्न मार्गों पर पुलिस के चेतावनी वाले बैनर लगाए गए थे, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा था कि क्षेत्र में निषेधाज्ञा (धारा 144) लागू है और पाँच या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह बनाकर धरना-प्रदर्शन करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। साइबर यूनिट द्वारा यह भी पूरी सतर्कता बरती गई कि इंटरनेट बाधित होने की स्थिति में भी सोशल मीडिया के जरिए किसी प्रकार की भ्रामक या हिंसात्मक सामग्री प्रसारित न हो सके।

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