खंडवा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से देश के कई शैक्षणिक संस्थानों में चली आ रही गांधी टोपी पहनने की एक पुरानी परंपरा अब खत्म हो गई है। वर्ष 1947 के बाद करीब 79 वर्षों तक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के प्रतीक के तौर पर गांधी टोपी पहनना अनिवार्य किया गया था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है।
गांधी टोपी का ऐतिहासिक महत्व
गांधी टोपी हमेशा से ही महात्मा गांधी, स्वतंत्रता संग्राम, सादगी, स्वदेशी और राष्ट्रीय चेतना का एक मजबूत प्रतीक मानी जाती रही है। देश के विभिन्न विद्यालयों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में विद्यार्थियों द्वारा इसे पहनना एक गौरवपूर्ण परंपरा का हिस्सा रहा है। हालांकि, इस व्यवस्था की अनिवार्यता खत्म होने के बाद इसके औपचारिक इस्तेमाल पर किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई गई है।
खंडवा के 134 साल पुराने स्कूल की अनूठी गाथा
स्मार्ट क्लास और डिजिटल युग के बीच, मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के छोपाबड़ स्थित 134 साल पुराने शासकीय बुनियादी स्कूल में यह अनूठी परंपरा लंबे समय तक जीवित रही। इस ऐतिहासिक विद्यालय की स्थापना 1 जनवरी 1892 को हुई थी।
79 साल बाद थमा सिलसिला
वर्ष 1947 के बाद से इस स्कूल के छात्र रोजाना गांधी टोपी पहनकर ही अपनी कक्षाओं में उपस्थित होते थे। साल 2025 तक यह नियम सुचारू रूप से प्रभावी रहा, लेकिन अब 79 साल पुराना यह सिलसिला पूरी तरह थम चुका है और यह अनूठी शैक्षणिक परंपरा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।

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