नई दिल्ली। राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक नए शोध में खुलासा हुआ है कि दिल्ली में मेट्रो, बसों और सड़कों पर सफर करने वाली महिलाओं को बड़े पैमाने पर यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। शाम के समय स्थिति सबसे अधिक गंभीर हो जाती है।
इंटरनेशनल जर्नल ‘द ओरिएंटल एंथ्रोपोलॉजिस्ट’ में प्रकाशित शोधपत्र ‘द इफेक्ट्स ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट इन पब्लिक ट्रांजिट स्पेसेज ऑन ट्रैवल बिहेवियर एंड वेल-बीइंग ऑफ यंग वुमन: एक्सपीरियंसेज फ्रॉम दिल्ली सिटी, इंडिया’ के मुताबिक, इस डर और उत्पीड़न के कारण महिलाओं को अपने सफर का समय, रूट और यात्रा का साधन तक बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
330 महिलाओं पर किया गया अध्ययन
यह शोध बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के शोधार्थी अटल द्विवेदी, रूही रावत और दून विश्वविद्यालय के शोधकर्ता अनिरुद्ध कुमार यादव समेत अन्य शोधार्थियों द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में 18 से 45 वर्ष की आयु वर्ग की 330 महिलाओं का सर्वेक्षण किया गया, जबकि 20 महिलाओं के विस्तृत साक्षात्कार लेकर उनके अनुभवों को शामिल किया गया।
सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े
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38.78% महिलाएं: सर्वे में हिस्सा लेने वाली 38.78 फीसदी महिलाओं ने माना कि उन्होंने सार्वजनिक परिवहन में खुद यौन उत्पीड़न का सामना किया है।
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30.30% महिलाएं: करीब 30.30 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने किसी अन्य महिला के साथ सार्वजनिक परिवहन में ऐसी अप्रिय घटना होते हुए अपनी आंखों से देखी है।
बदलना पड़ रहा है सफर का तरीका
शोध में यह बात सामने आई है कि उत्पीड़न के इन कड़वे अनुभवों और मन में बैठे लगातार डर ने महिलाओं के आवागमन के तरीकों को गहराई से प्रभावित किया है। सुरक्षा चिंताओं के चलते कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को अपनी दिनचर्या, यात्रा के मार्ग और वाहनों के चयन में भारी बदलाव करने पड़ रहे हैं।

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