बांसवाड़ा। गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा से सटी दक्षिणी राजस्थान की भौगोलिक स्थिति बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों के व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपराधियों के लिए भी एक आसान रास्ता बनती जा रही है। शराब और पशुओं के अवैध परिवहन के बाद अब वागड़ अंचल के ये दोनों जिले नकली करेंसी (जाली नोटों) के अवैध कारोबार के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सामने आए मामलों से यह साफ है कि यहां नकली नोटों का नेटवर्क गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है।
पेट्रोल पंप और भीड़भाड़ वाले बाजार बने आसान निशाना
बदमाशों और जाली नोट तस्करों के लिए पेट्रोल-डीजल पंप सबसे आसान जरिया साबित हो रहे हैं। यहां होने वाले भारी लेन-देन, निरंतर भीड़भाड़ और जल्दबाजी के माहौल में हर नोट की बारीकी से जांच करना कठिन होता है, जिसका फायदा उठाकर ये नकली नोट आसानी से बाजार और बैंकों तक पहुंच जाते हैं।
प्रमुख मामले और बढ़ता आपराधिक दायरा
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वर्ष 2026: डूंगरपुर के रामसागड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों से 4 लाख 95 हजार से अधिक के नकली नोट बरामद किए। जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए जाली नोट बनाना सीख रहे थे।
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वर्ष 2025: आनंदपुरी पुलिस ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर मुख्य आरोपी समेत 17 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।
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वर्ष 2024: कुशलगढ़ में लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह से करीब 2 करोड़ 90 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किए गए।
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वर्ष 2022-2023: सागवाड़ा के युवकों का अजमेर और दिल्ली तक जुड़ा नकली करेंसी नेटवर्क सामने आया। वहीं 2022 में बांसवाड़ा शहर के सरकारी क्वार्टर में एक लेखाकार द्वारा नोट छापने के खेल का भी खुलासा हुआ था।
नकली करेंसी के पैर पसारने के तीन मुख्य कारण
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अंतरराज्यीय सीमाएं: गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाएं नजदीक होने तथा सुगम सड़क परिवहन के कारण बाहरी अपराधियों का आना-जाना बेहद आसान है।
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जागरूकता की कमी: ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग नोट की गुणवत्ता, बनावट और सुरक्षा चिह्नों (Security Features) की जांच नहीं करते, जिससे तस्करों का काम आसान हो जाता है।
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बेरोजगारी का दुरुपयोग: अपराधी गिरोह स्थानीय युवाओं को कम समय में अधिक पैसों का लालच देकर 'पेडलर' के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
पुलिस की सख्ती और सुरक्षा चुनौतियां
बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले क्रमशः गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमाओं के बेहद करीब होने के कारण पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी के अनुसार, पुलिस आंतरिक मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाने के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों की पुलिस से मिलने वाले इनपुट पर त्वरित कार्रवाई कर रही है। हालांकि, इन नेटवर्क के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचना पुलिस के लिए अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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