भोपाल। मध्य प्रदेश के मौसम में सोमवार से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां मानसूनी तंत्र के कमजोर पड़ने से झमाझम बारिश के दौर पर विराम लगने के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, रविवार को प्रदेश के सात जिलों में तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 48 जिलों में हल्की बूंदाबांदी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मानसूनी प्रणाली के उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए निम्न दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने से अगले 24 घंटों के भीतर बारिश की गतिविधियों में गिरावट दर्ज की जाएगी।
नदियों में उफान और बांधों से जल निकासी
पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते राज्य के पूर्वी और मध्य इलाकों में नदियां और नाले उफान पर आ गए हैं। डिंडोरी और उमरिया जिलों में कई पुलों के ऊपर पानी बहने से आवागमन प्रभावित हुआ है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा बरगी, जोहिला और बिलगांव बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। मौसम विभाग ने शिवपुरी, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर और रीवा समेत कई संभागों के जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान जताया है।
महीने के अंत तक ऐसा रहेगा मौसम का मिजाज
सितंबर के अंतिम दिनों यानी 28 से 30 सितंबर के दौरान प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे। इस दौरान भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, इंदौर, चंबल, शहडोल, सागर और जबलपुर संभाग के जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा और झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। हालांकि, किसी भी क्षेत्र में भारी वर्षा की चेतावनी नहीं दी गई है, जिससे आम जनता और किसानों को जलभराव से राहत मिलने की उम्मीद है।
सीजन में अब तक बारिश के कुल आंकड़े
चालू मानसून सत्र में 1 जून से 26 सितंबर तक मध्य प्रदेश में औसतन 35.6 इंच वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य बारिश के आंकड़े से केवल चार प्रतिशत कम है। क्षेत्रवार स्थिति देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक पानी गिरा है, वहीं पश्चिमी हिस्सों में औसत से ग्यारह प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। राज्य के 25 जिलों में अब तक सामान्य और 30 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जबकि भोपाल, ग्वालियर, गुना और बुरहानपुर सहित कई जिलों में कोटा पूरा हो चुका है।
राज्य से जल्द होगी मानसून की विदाई
देश में मानसून की निर्धारित अवधि 1 जून से 30 सितंबर मानी जाती है और पड़ोसी राज्य राजस्थान के कई इलाकों से मानसूनी हवाओं की वापसी शुरू हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य प्रदेश में भी अगले एक सप्ताह के भीतर मानसूनी प्रणाली के वापस लौटने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। आने वाले दिनों में आसमान साफ होने के साथ ही प्रदेश भर में तापमान में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है।

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