साल में चार बार नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. इनमें दो गुप्त नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि शामिल हैं. इन सभी नवरात्रों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, लेकिन शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है. इस दौरान देशभर में घर-घर कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है. भक्त पूरे नौ दिनों तक मां के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. अब कुछ ही दिनों में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है और इस बार मां दुर्गा के आगमन को लेकर भी खास चर्चा है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत में बताया कि इस साल 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के वाहन का भी विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि माता किस वाहन पर सवार होकर धरती पर आती हैं, उससे आने वाले समय के शुभ-अशुभ संकेतों को जोड़ा जाता है. यानी नवरात्रि की शुरुआत सिर्फ पूजा-पाठ से ही नहीं, बल्कि मां के आगमन के वाहन से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी विशेष मानी जाती है.
भागवत पुराण में यह श्लोक है खास
पंडित नंद किशोर मुदगल के अनुसार, मां दुर्गा का वाहन नवरात्रि शुरू होने वाले दिन के आधार पर तय किया जाता है. देवी भागवत पुराण में इसका उल्लेख एक श्लोक के माध्यम से मिलता है- “शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥” इसी मान्यता के आधार पर यह देखा जाता है कि नवरात्रि की शुरुआत सप्ताह के किस दिन हो रही है और उसी के अनुसार मां के वाहन का निर्धारण किया जाता है. शास्त्रों में मां दुर्गा के वाहन के रूप में हाथी, घोड़ा, नौका और पालकी का उल्लेख मिलता है.
हाथी पर सवार होकर आ रही है मां दुर्गा
इस बार शारदीय नवरात्रि में मां जगदंबा हाथी पर सवार होकर आने वाली हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का हाथी पर आगमन बेहद शुभ संकेत माना जाता है. हाथी को सुख-समृद्धि, स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं तो देश और समाज में धन-धान्य की वृद्धि होती है और खुशहाली का वातावरण बनता है. इसके साथ ही आर्थिक समृद्धि और स्थिरता के भी संकेत माने जाते हैं.

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