September 25, 2026

भाजपा की लगातार जीत पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, लोकतंत्र को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए निर्वाचन प्रणाली और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। राहुल ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में 'एंटी-इन्कंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) एक स्वाभाविक और मौलिक शक्ति रही है, जो समय-समय पर प्रत्येक सरकार के विरुद्ध जनमत तैयार करती है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1971 का युद्ध जीतने और लोकप्रियता के शिखर पर होने के बावजूद कुछ ही वर्षों में सत्ता विरोधी माहौल बन गया था। उन्होंने प्रश्न उठाया कि वर्तमान में कुछ विशेष राजनीतिक परिस्थितियों में यह प्राकृतिक जनमत प्रक्रिया निष्प्रभावी कैसे दिखाई दे रही है।

निर्वाचन प्रक्रिया और संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हाल के लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित होने से लोकतांत्रिक ढांचा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का प्राथमिक दायित्व नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करना है, किंतु वर्तमान कार्यप्रणाली से संस्थागत निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। उनका कहना था कि यदि मताधिकार की गरिमा समाप्त होती है, तो संवैधानिक व्यवस्था और संस्थाओं की वैधता भी प्रभावित होती है।

तीन सदस्यीय आयोग के भीतर आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख

राहुल गांधी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर आयोग के भीतर से ही सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई हैं। राहुल के अनुसार, जब जनप्रतिनिधि निष्पक्ष जनमत के बजाय प्रभावित चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से चुनकर आते हैं, तो उनके द्वारा निर्मित कानून और संस्थागत निर्णय भी वैधानिक संदेह के घेरे में आ जाते हैं।

संवैधानिक ढांचे और मताधिकार की सुरक्षा की मांग

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह केवल चुनावी प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि देश के बुनियादी संवैधानिक ढांचे पर प्रभाव का मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1947 से निर्मित लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करना अनिवार्य है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल त्यागपत्र की मांग करते हुए कहा कि मताधिकार की सुरक्षा में हुई चूक की पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रियात्मक गड़बड़ी में शामिल प्रत्येक स्तर के उत्तरदायी व्यक्तियों की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए।

शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका और जांच की मांग

राहुल गांधी ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली को नुकसान पहुंचाने वाले हर कदम की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नेतृत्व के संरक्षण के बिना ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने दोहराया कि वे इन विषयों को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर देश के समक्ष रखते रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका प्रयास जारी रहेगा।

प्रकरण की पृष्ठभूमि और आंतरिक असहमति का ब्योरा

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी इस संबंध में अपनी बात रखी थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब निर्वाचन आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद की बातें सामने आई हैं। प्रकाशित विवरणों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विगत 10 महीनों में लगभग 14 अवसरों पर आयोग के कतिपय फैसलों और आदेशों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

प्रशासनिक निर्णयों और फॉर्म-6 में संशोधन पर विवाद

प्राप्त विवरणों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने आरोप लगाया था कि कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में उनकी पूर्व सहमति या जानकारी नहीं ली गई। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), नए मतदाताओं का पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने व जोड़ने, और मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे विषय सम्मिलित थे। विशेष रूप से नए मतदाताओं हेतु उपयोग होने वाले 'फॉर्म-6' में एसआईआर से जुड़े नए प्रश्न शामिल करने पर आपत्ति जताई गई थी। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू का मानना था कि नियमों में औपचारिक संशोधन के बिना ऐसा बदलाव प्रक्रियात्मक रूप से अनुचित है।

निर्वाचन आयोग द्वारा आरोपों का खंडन

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपना आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वह पूर्णतः संवैधानिक मर्यादाओं के अनुसार कार्य करता है। एक बहु-सदस्यीय निकाय होने के नाते आयोग के भीतर लिखित टिप्पणियां, तकनीकी विचार-विमर्श और आंतरिक जांच-परख एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने दृढ़ता से कहा कि उसकी समस्त कार्यवाहियां एवं निर्णय प्रचलित कानूनों और स्थापित दिशा-निर्देशों के पूर्णतः अनुरूप निष्पादित किए गए हैं।