सुल्तानपुर के एक प्राचीन मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है. कहा जाता है कि यहां अक्सर सांपों के जोड़े दिखाई देते हैं और स्थानीय लोग इन्हें मंदिर का रक्षक मानते हैं. खास बात यह है कि मंदिर के आसपास सांप दिखाई देने के बावजूद अब तक किसी श्रद्धालु को उनके द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी नहीं है. यही वजह है कि मंदिर से जुड़ी यह मान्यता आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला अपने पुराने धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है. अयोध्या के नजदीक होने के कारण जिले में कई प्राचीन मंदिर हैं. इन्हीं में से एक पंचमुखेश्वर मंदिर भवानीपुर सूरापुर गांव में स्थित है. स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास गुप्तकाल से जुड़ा हुआ है. यहां भगवान शिव का एक अनोखा शिवलिंग स्थापित है, जिस पर पांच मुख बने हुए हैं. कभी यह मंदिर बीहड़ जंगलों के बीच हुआ करता था, लेकिन समय के साथ यहां काफी बदलाव आया और आज यह सुल्तानपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है.
पांच मुख वाला अनोखा शिवलिंग
मंदिर के पुजारी विजय नाथ पाठक ने Local18 को बताया कि पंचमुखेश्वर मंदिर सुल्तानपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर भवानीपुर सूरापुर गांव में स्थित है. यहां भगवान शंकर का उर्ध्वमुखी शिवलिंग स्थापित है. इस शिवलिंग पर पांच मुख बने हुए हैं और बीच-बीच में नागों के कुंडल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं. इसी वजह से इसे पंचमुखेश्वर नाम दिया गया है.
पुजारी के अनुसार यह अति प्राचीन मंदिर है और स्थानीय लोगों के बीच इसका संबंध गुप्तकाल से माना जाता है. मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यताओं की वजह से आसपास के लोगों में इस स्थान के प्रति खास आस्था है.
मंदिर के आसपास दिखाई देते हैं सांपों के जोड़े
पंचमुखेश्वर मंदिर की सबसे चर्चित मान्यता यहां दिखाई देने वाले सांपों से जुड़ी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के आसपास अक्सर सांपों के जोड़े दिखाई देते हैं. मान्यता है कि ये सांप मंदिर की रक्षा करते हैं. पुजारी विजय नाथ पाठक ने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास सांप दिखाई देते रहते हैं, लेकिन अब तक किसी व्यक्ति को इनके द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की जानकारी नहीं है. इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच सांपों को लेकर भी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है.
शिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
पंचमुखेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि समेत कई हिंदू पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. खासकर शिवरात्रि के दिन यहां भक्तों की भीड़ रहती है. श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि क्षेत्र की पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल भी है. गुप्तकाल से जुड़ी मान्यता, पांच मुख वाला शिवलिंग और मंदिर के आसपास सांप दिखाई देने की स्थानीय मान्यता इसे सुल्तानपुर के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.

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