नई दिल्ली। घर की रसोई का बजट एक बार फिर आम जनता पर भारी पड़ने लगा है। पिछले कुछ समय में अरहर दाल, एडिबल ऑयल (खाद्य तेल), आलू और प्याज जैसी अति-आवश्यक वस्तुओं के खुदरा दामों में काफी उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही रसोई की रीढ़ मानी जाने वाली हरी सब्जियों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़े
उपभोक्ता मामले विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दलहन श्रेणी में अरहर (तुअर) दाल की औसत खुदरा कीमत 124.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 113.66 रुपये प्रति किलो थी। इसके अतिरिक्त चना, उड़द, मूंग और मसूर की दालों में भी उछाल आया है।
सब्जियों के मोर्चे पर आलू के दाम पिछले साल की तुलना में सीमित बढ़े हैं, लेकिन प्याज और टमाटर की कीमतों ने आम उपभोक्ताओं को बेहाल कर दिया है:
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प्याज: 20 सितंबर को प्याज का औसत खुदरा मूल्य 54.23 रुपये प्रति किलो दर्ज हुआ, जो बीते साल इसी अवधि में महज 25.97 रुपये प्रति किलो था।
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टमाटर: टमाटर की खुदरा दर 39.16 रुपये प्रति किलो रही, जो पिछले साल 36.48 रुपये प्रति किलो थी।
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आलू: आलू का भाव 22 रुपये प्रति किलो से ऊपर बना हुआ है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
खाद्य तेलों का औसत खुदरा मूल्य (रुपये/किलो)
| तेल का प्रकार | वर्तमान भाव | एक साल पहले | कुल वृद्धि |
| मूंगफली तेल | 208.44 | 186.93 | 21.51 |
| सरसों तेल | 201.02 | 188.80 | 12.22 |
| वनस्पति तेल | 167.16 | 156.74 | 10.42 |
| सोयाबीन तेल | 166.73 | 147.14 | 19.52 |
| सूरजमुखी तेल | 192.56 | 161.40 | 31.16 |
| पाम तेल | 151.40 | 132.98 | 18.42 |
साल भर में खाद्य तेल 31 रुपये तक महंगे
बीते एक वर्ष के दौरान एडिबल ऑयल की औसत खुदरा कीमतों में 31 रुपये प्रति किलो तक की वृद्धि देखी गई है। मूंगफली का तेल 186.93 रुपये से चढ़कर 208.44 रुपये प्रति किलो और सरसों का तेल 188.80 रुपये से बढ़कर 201.02 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है।
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
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कमजोर मानसून का असर: 17 सितंबर तक देश में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। खरीफ फसलों के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में वर्षा की कमी से धान और तिलहन की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
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पाम तेल का बायोफ्यूल में उपयोग: भारत अपनी कुल एडिबल ऑयल आवश्यकता का 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें पाम तेल की हिस्सेदारी 50-60 प्रतिशत है। प्रमुख निर्यातक देश इंडोनेशिया और मलेशिया पाम तेल का बड़ा हिस्सा बायोफ्यूल बनाने में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति कम और कीमतें अधिक हो गई हैं।
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रूस-यूक्रेन युद्ध एवं लॉजिस्टिक्स संकट: भारत में सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा रूस और यूक्रेन से आता है। जारी सैन्य संघर्ष और काला सागर क्षेत्र में शिपिंग बाधाओं के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय बाजार में सूरजमुखी तेल महंगा हुआ है।

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