September 19, 2026

नंदीग्राम उपचुनाव से पहले बड़ा ड्रामा: ममता समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब चुनाव आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए फ्रीज कर दिया। आगामी उपचुनावों के मद्देनजर आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद और याचिका पर सुनवाई

पार्टी के नाम और सिंबल पर आए इस फैसले के खिलाफ ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और बहुसंख्यक कैडर के दावों का ठीक से परीक्षण किए बिना यह अंतरिम आदेश जारी किया है। इस मामले में 21 सितंबर को अदालत में सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की पूरी संभावना है, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।

बागी विधायकों की अयोग्यता और नेता प्रतिपक्ष पद की खींचतान

पार्टी और चुनाव चिह्न के विवाद के साथ-साथ बागी विधायकों की सदस्यता का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। ममता गुट द्वारा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी समेत 10 बागी विधायकों (जिनमें अरूप राय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मिन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं) को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की गई है। इसके अलावा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर भी तकरार जारी है, जहां ममता खेमे ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दी, जिसे कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

नंदीग्राम उपचुनाव का नाटकीय घटनाक्रम और गिरफ्तारी

नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। ममता गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया (नामांकन वापसी से पहले उनकी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात भी चर्चा में रही)। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया, लेकिन इसके कुछ ही घंटों के भीतर पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस और ममता गुट ने इस गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, जबकि 1998 से चली आ रही टीएमसी की मूल पहचान पर आए इस संकट ने बंगाल की राजनीति को बेहद दिलचस्प बना दिया है।