वाशिंगटन/नेप्यीडॉ। अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने हाल ही में जानकारी दी है कि म्यांमार की राजधानी नेप्यीडॉ में वहां के अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने एक हिरासत में बंद अमेरिकी नागरिक की सकुशल रिहाई सुनिश्चित कर ली है। हालांकि, इस पूरी कूटनीतिक कार्रवाई के पीछे के कई अहम विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिकी नागरिक एडम कैस्टिलो की रिहाई
रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यांमार में हिरासत से रिहा किए गए अमेरिकी नागरिक का नाम एडम कैस्टिलो है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि कैस्टिलो को किस वजह से हिरासत में लिया गया था, वे कितने वक्त से कैद में थे और उनकी रिहाई किन परिस्थितियों के तहत संभव हो पाई। इसके अलावा, इस दौरे में शामिल अमेरिकी अधिकारियों और म्यांमार के मिलने वाले स्थानीय अधिकारियों के नामों को भी गोपनीय रखा गया है।
सीधी बातचीत और कूटनीतिक प्रयास
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस दौरे को वॉशिंगटन की उस रणनीति का हिस्सा बताया है जिसके तहत अमेरिकी हितों से जुड़े मामलों को सीधे संवाद के जरिए सुलझाया जाता है। प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने के लिए बर्मा (म्यांमार) के सभी समूहों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखता है। अमेरिका साल 1947 से लगातार बर्मा में अपनी राजनयिक मौजूदगी दर्ज कराता आ रहा है।
मानवीय सहायता और शांति की अपील
नेप्यीडॉ के अधिकारियों के साथ हुई इन बैठकों में केवल रिहाई का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि अमेरिका ने म्यांमार प्रशासन के सामने कई कड़े रुख भी रखे:
-
हिंसा पर रोक: देश में जारी हिंसक संघर्षों को तुरंत बंद करने की मांग की गई।
-
मानवीय मदद: जरूरतमंद और प्रभावित लोगों तक निर्बाध मानवीय सहायता पहुंचाने की अनुमति देने पर जोर दिया गया।
-
राजनीतिक कैदी: क्षेत्र में लंबे समय तक टिकने वाली शांति स्थापित करने के लिए सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग उठाई गई।
प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमेरिका की इन मांगों पर म्यांमार के अधिकारियों की तरफ से क्या प्रतिक्रिया दी गई है।

More Stories
कोहाट पुलिस लाइंस में जोरदार धमाका, नमाज के वक्त फिदायीन हमला; 16 की मौत
हवाई जहाज में पहले हुई कहासुनी, फिर फिल्मी अंदाज में चले लात-घूंसे; वीडियो वायरल
सऊदी के साथ खड़ा पाकिस्तान, जरूरत पड़ने पर सैनिक भेजने को भी तैयार