नई दिल्ली/गुरुग्राम। दिल्ली पुलिस और गुरुग्राम पुलिस की गंभीर कार्यप्रणाली और समन्वय की कमी के कारण एक बेहद ही दुखद मामला सामने आया है। दिल्ली के सरिता विहार निवासी युवराज सिंह मनचंदा के परिजनों को न तो अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने का अवसर मिला और न ही उसकी अस्थियां नसीब हुईं।
गुरुग्राम पुलिस ने युवक के शव को लावारिस मानकर महज तीन दिनों के भीतर पोस्टमार्टम कराने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि दिल्ली की लाजपत नगर थाना पुलिस एफआईआर दर्ज कर अपनी औपचारिकताएं पूरी करने में ही उलझी रही।
जिपनेट प्रणाली और अंतरराज्यीय समन्वय पर उठे गंभीर सवाल
स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर दिल्ली पुलिस द्वारा बुलाई गई अंतरराज्यीय समन्वय बैठकों में गुरुग्राम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए थे। इसके अतिरिक्त देशभर के पुलिस तंत्र को आपस में जोड़ने के लिए 'जिपनेट' (ZIPNET) प्रणाली भी सक्रिय है, जिस पर हर राज्य की पुलिस गुमशुदा और अज्ञात शवों की फोटो व जानकारी तत्काल साझा करती है।
दिल्ली और गुरुग्राम के बीच महज 40 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद दोनों राज्यों की पुलिस द्वारा इस अत्याधुनिक प्रणाली का उपयोग न करना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
आरोपियों की 24 घंटे की कस्टडी के बाद भी हत्या की वजह अस्पष्ट
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस की जांच प्रणाली और पूछताछ के तरीकों पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों को 24 घंटे तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद भी पुलिस हत्या के मुख्य कारणों का पता लगाने में असफल रही है।
जांच अधिकारी का बयान
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दक्षिण-पूर्व जिले के पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि हत्याकांड के पीछे की वास्तविक वजहों का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस की टीम मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

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