चेन्नई। तमिलनाडु में विपक्षी गठबंधन के भीतर प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर कांग्रेस और टीवीके (TVK) के बीच मतभेद सतह पर आते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में दोनों दलों के नेताओं के बयानों से गठबंधन के भविष्य और नेतृत्व को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
कांग्रेस नेता सेल्वापेरुंथगई की दोटूक: "राहुल गांधी हों पीएम पद का चेहरा"
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सेल्वापेरुंथगई ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि गठबंधन में शामिल सभी सहयोगी दलों को राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने दो टूक अंदाज में यहां तक कह दिया कि यदि कोई दल इसके लिए तैयार नहीं है, तो ऐसे गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार, कांग्रेस को केवल उन्हीं दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए जो खुले तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करें।
सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने मतभेद की खबरों को नकारा
दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने इन बयानों के बीच किसी भी तरह के मतभेद या गठबंधन में दरार की अटकलों को खारिज किया है। सेल्वापेरुंथगई के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई समन्वय बैठक में गठबंधन के नाम 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' (जिसके अध्यक्ष विजय हैं) पर मुहर लगी थी, और दोनों दलों के बीच सब कुछ ठीक है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने हाल ही में राहुल गांधी से मुलाकात कर राज्य के राजनीतिक हालात पर चर्चा की है।
कार्ति चिदंबरम की दो टूक: "संख्याबल तय करेगा प्रधानमंत्री"
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल को अपने नेता को आगे बढ़ाने और उनकी आकांक्षाओं की बात करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह साफ है कि प्रधानमंत्री पद का फैसला चुनाव के बाद लोकसभा के वास्तविक संख्याबल (बहुमत) के आधार पर ही होता है।
9 सितंबर को हुआ था गठबंधन के नाम का ऐलान
गौरतलब है कि इसी महीने की 9 तारीख को चेन्नई में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में टीवीके और कांग्रेस के बीच गठबंधन को औपचारिक रूप दिया गया था। इस बैठक में तमिलनाडु कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे, लेकिन अब प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर उठे बयानों ने राजनीतिक गलियारों में नए चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

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