भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अभी वक्त बाकी है, लेकिन राज्य की राजनीतिक सरगर्मी ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच लिया है। लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बीच यह संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश में एक मजबूत 'तीसरा मोर्चा' आकार ले रहा है, जो आने वाले समय में सत्ताधारी दल बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
तीसरे मोर्चे की आहट और जमीनी हकीकत
राजधानी भोपाल से लेकर विंध्य क्षेत्र के रीवा तक इन दिनों विभिन्न मुद्दों पर प्रदर्शनों का दौर जारी है। हालांकि इन आंदोलनों में अभी किसी आधिकारिक नए मोर्चे ने औपचारिक रूप से एंट्री नहीं ली है, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों और हालिया राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि निर्दलीय और क्षेत्रीय दल मिलकर राज्य में तीसरा विकल्प तैयार कर रहे हैं, जिसका असर अब मैदानी स्तर पर भी दिखने लगा है।
दतिया उपचुनाव में तीसरे मोर्चे का असर
हाल ही में दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे इस बात की गवाही देते हैं कि तीसरा मोर्चा किस तरह पारंपरिक दलों के समीकरण बिगाड़ सकता है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके पीछे तीसरे मोर्चे की सक्रियता को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
दतिया में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पार्टी उम्मीदवार दामोदर यादव ने 22 हजार से अधिक वोट हासिल किए, जबकि बीजेपी और कांग्रेस के बीच हार-जीत का अंतर महज 6 हजार वोटों के आसपास रहा। खास बात यह रही कि तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार ने कई ऐसे इलाकों में भी अच्छी बढ़त बनाई जो पारंपरिक रूप से मजबूत गढ़ माने जाते थे।
कांग्रेस के सामने भी खड़ी हुई नई चुनौती
भले ही दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर ली हो, लेकिन उसके लिए भी यह नतीजे आत्ममंथन का विषय हैं। चुनाव के कई राउंड में कांग्रेस प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर मिली और मजबूत माने जाने वाले वोटों में सेंधमारी देखने को मिली। इससे यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश में तीसरा मोर्चा अब केवल कागजी चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी मैदान पर भी असर डालने की कुब्बत रखता है।
आम आदमी पार्टी की आक्रामक तैयारियां
तीसरे विकल्प की दौड़ में आम आदमी पार्टी (AAP) भी पीछे नहीं है। पार्टी ने मध्य प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करनी शुरू कर दी हैं और आगामी 2028 के विधानसभा चुनावों में प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। संगठन को धार देने के लिए पार्टी राज्य स्तर से लेकर बूथ स्तर तक व्यापक विस्तार अभियानों में जुटी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले के आसार और अधिक मजबूत होते जा रहे हैं।

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