September 16, 2026

नागौर से बाहर RLP का विस्तार, निकाय चुनाव में 14 जिलों में उतरेगी पार्टी

जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों ने पारंपरिक द्वि-दलीय व्यवस्था (भाजपा और कांग्रेस) के बीच क्षेत्रीय और अन्य दलों के लिए भी संभावनाएं तलाशने के संकेत दिए हैं। चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), आम आदमी पार्टी (आप), माकपा (सीपीएम) और भारत आदिवासी पार्टी (बाप) जैसी पार्टियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

विभिन्न दलों का प्रदर्शन और प्रभाव क्षेत्र

  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी): हनुमान बेनीवाल की पार्टी ने चौदह जिलों में कुल त्रेसठ वार्ड जीतकर अपनी क्षेत्रीय पकड़ मजबूत की है। हालांकि इसका मुख्य प्रभाव नागौर और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित है, लेकिन पार्टी ने राज्य के चौदह जिलों तक अपनी पहुंच बनाई है।

  • आम आदमी पार्टी (आप): 'आप' ने बारां नगर परिषद में साठ में से इकतीस वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और वहां अपना बोर्ड बनाने में सफलता प्राप्त की है।

  • माकपा (सीपीएम): बीकानेर जिले के नोखा निकाय में माकपा ने पंतालीस में से उन्नतीस सीटों पर जीत दर्ज कर अपना बोर्ड बनाने की स्थिति मजबूत की है।

  • भारत आदिवासी पार्टी (बाप): चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद बांसवाड़ा में पार्टी ने आंतरिक कलह और मतभेदों के चलते जिले की पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया है।

राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं

  • विशेषज्ञों का मत: वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, इन नतीजों से राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प की सुगबुगाहट जरूर शुरू हुई है, लेकिन इसे आगामी विधानसभा चुनाव (2028) के बड़े बदलाव के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।

  • कांग्रेस और भाजपा का पक्ष: कांग्रेस के अनुसार छोटे दलों की स्थानीय जीत को प्रदेशव्यापी बदलाव नहीं माना जा सकता, जबकि भाजपा का कहना है कि ये नतीजे स्थानीय समीकरणों का परिणाम हैं और पार्टी का संगठन पूरे प्रदेश में सुदृढ़ है।