September 15, 2026

अफगानिस्तान के खिलाफ जीत से मिली राहत, लेकिन इन कमजोरियों ने बढ़ाई चिंता; टीम इंडिया को करना होगा सुधार

दिल्ली में अफगानिस्तान के विरुद्ध खेले गए प्रथम टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने 7 विकेट से एकतरफा जीत दर्ज की। पहले गेंदबाजी करते हुए भारत ने मेहमान टीम को 20 ओवरों में 8 विकेट पर 156 रनों के स्कोर पर रोक दिया। इसके जवाब में सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की आक्रामक पारी के दम पर भारत ने 13.4 ओवरों में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। अभिषेक ने 32 गेंदों में 82 रन ठोके। यद्यपि भारत ने मुकाबला आसानी से जीत लिया, परंतु इस मैच ने आगामी प्रतियोगिताओं से पूर्व टीम प्रबंधन के सामने पांचवें गेंदबाज और शीर्ष क्रम के संयोजन को लेकर कुछ अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत की पाँच प्रमुख ताकतें

1. चार मुख्य गेंदबाजों की कसी हुई गेंदबाजी भारत के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू चार प्रमुख गेंदबाजों—जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन रहा। इन चारों ने मिलकर 96 गेंदों में 57 डॉट गेंदें फेंकी। बुमराह ने वापसी करते हुए 1/26 का स्पैल डाला, जबकि अर्शदीप ने 3/19 लेकर अफगान बल्लेबाजी की रीढ़ तोड़ दी।

2. विपक्षी बल्लेबाजों के छक्कों पर लगाया अंकुश टी20 प्रारूप में बाउंड्री रोकना बेहद महत्वपूर्ण होता है और भारतीय गेंदबाजों ने अफगानिस्तान की ओर से पूरी पारी में केवल सात छक्के ही लगने दिए। बुमराह की सटीक लेंथ और अर्शदीप की यॉर्कर गेंदों ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

3. अभिषेक शर्मा का तूफानी अर्धशतक अभिषेक शर्मा ने मात्र 32 गेंदों पर 82 रनों की आतिशी पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 7 छक्के शामिल थे। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने बिना किसी नेट रन रेट के दबाव के लक्ष्य को हासिल कर लिया।

4. लक्ष्य का पीछा करने में आक्रामक दृष्टिकोण 157 रनों के लक्ष्य के सामने भारतीय शीर्ष क्रम ने आक्रामक रवैया अपनाया और शुरू से ही जोखिम उठाने में झिझक नहीं दिखाई, जो आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग है।

5. बुमराह की वापसी से गेंदबाजी को मिली मजबूती लगभग छह महीने बाद टी20 प्रारूप में लौटे जसप्रीत बुमराह की मौजूदगी से गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव और विविधता दोनों प्राप्त हुई, जो आगामी बड़े टूर्नामेंटों के दृष्टिकोण से राहत की खबर है।

चार बड़ी कमजोरियां जिन पर सुधार अनिवार्य

1. पांचवें गेंदबाज का विकल्प साबित हुआ बेअसर भारत की मुख्य चिंता पांचवें गेंदबाज को लेकर रही। नीतीश कुमार रेड्डी और शिवम दुबे ने मिलकर 3 ओवरों में 51 रन लुटाए, यानी औसतन 17 रन प्रति ओवर। इसके विपरीत, बाकी चार मुख्य गेंदबाजों का संयुक्त इकॉनमी रेट मात्र 6.56 रहा।

2. शुरुआती झटकों के बाद विरोधी टीम को वापसी का मौका देना एक समय अफगानिस्तान का स्कोर 43 रन पर 5 विकेट था। भारत के पास उन्हें कम स्कोर पर समेटने का अवसर था, किंतु अजमतुल्लाह ओमरजई (64 रन) की पारी के कारण वे 156/8 तक पहुँचने में सफल रहे।

3. अंतिम ओवर में लुटाए 21 रन पारंपरिक रूप से अंतिम ओवर फेंकने आए शिवम दुबे को ओमरजई और मुजीब उर रहमान ने आड़े हाथों लिया और 20वें ओवर में 21 रन बटोर लिए। डैथ ओवरों में यह ढिलाई बड़े मैचों में भारी पड़ सकती है।

4. संजू सैमसन का फिर से असफल होना पारी की शुरुआत करने आए अनुभवी संजू सैमसन केवल 10 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वैभव सूर्यवंशी और ईशान किशन जैसे विकल्पों की मौजूदगी में सैमसन पर अपनी उपयोगिता साबित करने का दबाव बढ़ गया है।

संतुलन और पांचवें गेंदबाज का चयन बना पहेली

हार्दिक पांड्या की गैरमौजूदगी में पांचवें गेंदबाज के कोटे को पूरा करना टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यदि नीतीश और दुबे गेंद से निरंतरता नहीं दिखा पाते हैं, तो वॉशिंगटन सुंदर को शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। दिल्ली में मिली यह जीत भले ही शानदार हो, परंतु आगामी कठिन मुकाबलों से पूर्व पांचवें गेंदबाज और बल्लेबाजी क्रम के संतुलन को दुरुस्त करना प्रबंधन की प्राथमिकता होगी।