भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के भविष्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज मंगलवार को होने वाली अहम सुनवाई फिलहाल टल गई है। न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण यह मामला आज सूचीबद्ध नहीं हो सका, जिससे शहर के करीब 62,500 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले में फैसले का इंतजार बढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला?
अगस्त की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। शहर में चिन्हित कुल 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद तीन दिनों तक चले सीलिंग अभियान के दौरान 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया था। हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने के बाद नगर निगम ने यह अभियान रोक दिया था और पिछले करीब 15 दिनों से इस पर कोई नई कार्रवाई नहीं हुई है।
नगर निगम और रहवासी पक्ष का रुख
-
नगर निगम का पक्ष: निगम ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट और विस्तृत हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पहले ही जमा कर दिया है, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा दिया गया है।
-
याचिकाकर्ता का पक्ष: याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी और रहवासी पक्ष ने नगर निगम की रिपोर्ट को अधूरा और भ्रामक बताया है। उनका दावा है कि जिन प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई दिखाई गई थी, उनमें से कई दोबारा से संचालित होने लगे हैं और जमीन पर स्थिति रिपोर्ट से मेल नहीं खाती।
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और नए आदेश पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि आवासीय क्षेत्रों में चल रहे इन कारोबारों पर आगे क्या कार्रवाई होगी।

More Stories
शहडोल में चाकूबाजी से सनसनी, वारदात के चंद घंटों में तीनों आरोपी गिरफ्तार
अब 15 मिनट में आएगी मेट्रो, भोपाल के यात्रियों को मिली बड़ी राहत
ग्वालियर पुलिस का बड़ा एक्शन! बाइक चोर गिरोह पकड़ा, 4 आरोपी गिरफ्तार; 6 मोटरसाइकिल मिलीं