September 15, 2026

21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू होगा? अमित शाह के बयान पर NDA में सवाल

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा वर्ष 2029 से पहले बीजेपी शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की घोषणा के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सियासी पारा चढ़ गया है। मुंबई में दिए गए अपने संबोधन में शाह ने यूसीसी को सरकार का प्रमुख एजेंडा बताते हुए कहा था कि देश में नागरिकों के लिए एक समान कानून होना बेहद जरूरी है, जिसके दायरे में शादी, तलाक और विरासत जैसे व्यक्तिगत कानून आएंगे। हालांकि, इस ऐलान के बाद एनडीए के भीतर ही अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

एनडीए के भीतर हलचल और जेडीयू का रुख

गृह मंत्री के इस बयान के तुरंत बाद गठबंधन के प्रमुख सहयोगियों ने अपने विचार स्पष्ट करने शुरू कर दिए हैं। बिहार में भारतीय जनता पार्टी की अहम सहयोगी पार्टी जेडीयू (JDU) ने साफ संकेत दिया है कि वह बिना किसी व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श के यूसीसी लागू करने के हक में नहीं है। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का कहना है कि इस अति-संवेदनशील विषय पर सभी संबंधित पक्षों की राय लेना आवश्यक है और पार्टी नेता जल्द ही इस संबंध में अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करेंगे।

सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं और मांगें

यूसीसी के इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने भी जल्दबाजी न दिखाने की सलाह दी है। उनका तर्क है कि देश की सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए पहले यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि विभिन्न समुदायों व हितधारकों के साथ सार्थक चर्चा हो सके। वहीं, टीडीपी (TDP) ने फिलहाल इस मामले पर कोई अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है और उचित समय पर अपनी राय रखने की बात कही है।

राज्यों में यूसीसी की स्थिति

गौरतलब है कि उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, असम और गुजरात जैसे राज्यों में यूसीसी की दिशा में पहले ही प्रशासनिक और विधायी स्तर पर कदम बढ़ाए जा चुके हैं। ऐसे में अमित शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल कानून का ड्रा तैयार करना नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर सभी साझीदार दलों के बीच पूर्ण सहमति और समन्वय बिठाना होगी।