नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और आर्थिक हितों से जुड़े चार गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस द्वारा उठाए गए चार प्रमुख मुद्दे
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गलवां घाटी और सीमा की स्थिति: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 19 जून 2020 की सर्वदलीय बैठक में दिए गए प्रधानमंत्री के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सीमा में कोई नहीं घुसा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस बयान का बाद की सीमा वार्ताओं और भारत की रणनीतिक स्थिति पर कोई असर पड़ा है?
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पूर्वी लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश: पार्टी ने आरोप लगाया कि पूर्वी लद्दाख में पारंपरिक पेट्रोलिंग और चराई गतिविधियों पर असर पड़ा है। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों, जगहों के नाम बदलने और ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित मेडोग मेगा-डैम परियोजना से पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर मंडराते खतरों का मुद्दा भी उठाया गया।
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ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका: कांग्रेस ने सैन्य अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए पूछा है कि क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान चीन ने पाकिस्तान को कोई सहायता दी थी और क्या चीनी राष्ट्रपति से मिलने से पहले भारत के कूटनीतिक रुख में कोई बदलाव आया है?
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रिकॉर्ड व्यापार घाटा: आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पार्टी ने कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स के लिए चीन पर बढ़ती निर्भरता को देश के एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए चिंताजनक बताया है।
कांग्रेस का कहना है कि चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और रिश्ते सुधारना एक पक्ष है, लेकिन देश की सुरक्षा और आर्थिक स्वावलंबन से जुड़े इन बुनियादी सवालों पर सरकार को अपनी स्पष्ट नीति देश के सामने रखनी चाहिए। इस मामले पर फिलहाल सरकार या सत्तारूढ़ दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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