नई दिल्ली
ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026: पीयूष गोयल का साझा बाजार और गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने का बड़ा आह्वान
नई दिल्ली| केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स 2026 के मंच से सदस्य और साझेदार देशों से अपने बाजार एक-दूसरे के लिए खोलने का जोरदार आग्रह किया। उन्होंने गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और आपसी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने का स्पष्ट आह्वान किया। मंत्री ने गहरे आर्थिक एकीकरण पर बल देते हुए कहा कि यह समूह अधिक लचीली आपूर्ति शृंखलाएं बनाने और वर्तमान में खंडित हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
लचीली आपूर्ति शृंखला और आर्थिक संवर्द्धन पर जोर
अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि सदस्य और भागीदार राष्ट्रों के बीच व्यापारिक संबंध अधिक गहरे और सुदृढ़ होने चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि आपूर्ति शृंखलाएं दोनों दिशाओं में बिना किसी संरक्षणवादी बाधा के सुचारू रूप से चलनी चाहिए। गोयल के अनुसार, व्यापार किसी भी स्थिति में विकास और जन-कल्याण में बाधक नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसे समावेशी आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बनना चाहिए।
बाजार पहुंच को सुगम बनाने और नियामक प्रक्रिया पर बल
गोयल ने समूह के देशों से कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों सहित अपने उत्पादों के लिए बाजार के दरवाजे खोलने की अपील की:
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प्रक्रियाओं का सरलीकरण: नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर सीमा शुल्क (कस्टम्स) निकासी में तेजी लाई जानी चाहिए।
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गैर-टैरिफ बाधाओं पर प्रभाव: गैर-टैरिफ उपाय व्यापार में सबसे बड़ी रुकावट हैं, जो टैरिफ की तुलना में निर्यात लागत को बहुत अधिक बढ़ा देते हैं।
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समान अवसर: खुले बाजार और कम प्रशासनिक अड़चनों से ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों को समान रूप से लाभ प्राप्त होगा।
व्यापारिक लागत घटाने और प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उपाय
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि गैर-टैरिफ अड़चनों को दूर करने से व्यापारिक गतिविधियों में लगने वाला समय और अतिरिक्त खर्च दोनों कम होंगे। प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने से सीमा पार व्यापार प्रवाह सुगम होगा और सदस्य राष्ट्रों के बीच व्यावसायिक व रणनीतिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य एजेंडा और वैश्विक प्रभाव
भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता का उपयोग सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कर रहा है:
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वैश्विक हिस्सेदारी: ब्रिक्स देश कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा कवर करते हैं।
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जनसंख्या और जीडीपी: यह समूह दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।
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भावी लक्ष्य: भारत का मुख्य उद्देश्य इन वैश्विक आंकड़ों का लाभ उठाकर समूह के भीतर पारस्परिक व्यापार संबंधों को मजबूत करना और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में ब्रिक्स की केंद्रीय भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना है।

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