तिरुवनंतपुरम: कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़े वित्तीय अनियमितता प्रकरण को लेकर केरल का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना टी और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास को राजनीतिक द्वेष के तहत निशाना बनाने का आरोप लगाया है। गोविंदन ने सवाल उठाया कि जब निजी खनन कंपनी से 152 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन कई संस्थाओं और नेताओं के साथ हुआ, तो केंद्रीय एजेंसी केवल एक ही पक्ष पर ध्यान क्यों केंद्रित कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सामान्य राजनीतिक चंदे का मामला नहीं है और विधि अनुसार जांच आगे बढ़नी चाहिए।
'अन्य नेताओं के वित्तीय लेन-देन की जांच क्यों नहीं?'
एम.वी. गोविंदन ने राज्य पुलिस प्रमुख को पत्र भेजकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की ईडी की सिफारिश को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमआरएल के रिकॉर्ड्स में करीब 152 करोड़ रुपये के वितरण का ब्योरा है, जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालिकुट्टी और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी जैसे नेताओं के नाम भी दर्ज हैं। गोविंदन ने सवाल किया कि केवल वीना की बंद हो चुकी कंपनी 'एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस' को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है, जिससे एजेंसी की नीयत पर संदेह पैदा होता है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच गुप्त समझौते का आरोप
माकपा नेता ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की भूमिका को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राष्ट्रीय इकाई के नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का विरोध करती है, जबकि राज्य में वह वामपंथी नेताओं की गिरफ्तारी की मांग करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में कांग्रेस और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे साठगांठ चल रही है, जिसका वाम मोर्चा राजनीतिक व कानूनी दोनों मोर्चों पर डटकर मुकाबला करेगा।
एक्सालॉजिक को 2.78 करोड़ भुगतान और 50 लाख के ऋण का मामला
केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, खनन कंपनी सीएमआरएल ने परामर्श सेवाओं के नाम पर वीना की पूर्व कंपनी एक्सालॉजिक को कथित रूप से 2.78 करोड़ रुपये का नियम विरुद्ध भुगतान किया। इसके अतिरिक्त, सीएमआरएल प्रबंधन से जुड़ी एक निवेश कंपनी द्वारा एक्सालॉजिक को 50 लाख रुपये का ऋण दिया गया था, जो समय पर नहीं चुकाया गया। एजेंसी का दावा है कि तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों में यूएई मुद्रा और भारतीय रुपये के संदिग्ध हस्तांतरण के ब्योरे दर्ज हैं।
गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
एसएफआईओ की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सीएमआरएल ने 15 वर्षों की अवधि में लगभग 182 करोड़ रुपये के फर्जी नकद खर्च दिखाए। आरोप है कि इन राशियों का उपयोग विभिन्न प्रभावशाली व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। इसी कड़ी में ईडी की कोच्चि इकाई ने कोझिकोड में नौ स्थानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत छापेमारी कर साक्ष्य जुटाए थे।
सामान्य चंदे और अवैध लेनदेन में अंतर: विपक्षी नेता वी.डी. सतीसन
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीसन ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त वैध चंदे और बिना सेवा प्रदान किए निजी कंपनियों से धन प्राप्त करने में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां कानून के तहत कार्रवाई कर रही हैं। राज्य सरकार को ईडी द्वारा भेजे गए पत्रों और साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
केपीसीसी अध्यक्ष का बयान: जांच प्रक्रिया में किसी का हस्तक्षेप नहीं
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि हालिया जांच में आए तथ्य अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने माकपा से राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों पर आधारित स्पष्टीकरण देने की मांग की। जोसेफ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय एजेंसियां अपने क्षेत्राधिकार में निष्पक्ष जांच कर रही हैं और इसमें राज्य कांग्रेस या सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
भावी कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम पर टिकीं निगाहें
माकपा द्वारा केंद्रीय एजेंसी के दावों को 'गढ़ी गई कहानी' करार दिए जाने और विपक्ष द्वारा त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की मांग से राज्य में प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य का गृह विभाग और पुलिस प्रशासन केंद्रीय एजेंसी द्वारा भेजे गए पत्राचार एवं साक्ष्यों पर क्या कानूनी रुख अपनाते हैं।

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