चेन्नई| सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (DVAC) ने पूर्व मंत्री केएन नेहरू को मुख्य अभियुक्त बनाते हुए 12 अन्य लोगों के खिलाफ 1,020 करोड़ रुपये के बड़े भ्रष्टाचार मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। इस प्रकरण में सरकारी ठेकों (टेंडरों) में व्यापक स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी करने और अवैध रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
एफआईआर में पूर्व विधायकों व करीबियों के नाम शामिल
प्राथमिकी के अनुसार, द्रमुक नेता के भाइयों के साथ-साथ पार्टी के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम और जे.जे. एबेनेजर को भी नामजद किया गया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने चुनिंदा ठेकेदारों की सिफारिश की, निविदा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक कीं और अवैध रूप से एकत्र की गई रिश्वत की राशि का पूरा लेखा-जोखा रखा। जांच एजेंसी का दावा है कि पूर्व मंत्री ने उच्च पदस्थ अधिकारियों तक पहुंच बनाकर टेंडर आवंटन प्रक्रिया को प्रभावित किया।
पार्टी फंड के नाम पर 1020 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा
जांच रिपोर्ट के अनुसार, नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के पूर्व मंत्री ने अपने परिजनों और मुख्य सहयोगियों को ठेकेदारों व लोक सेवकों से पार्टी फंड के नाम पर धन वसूलने की छूट दे रखी थी। कुल कॉन्ट्रैक्ट राशि का लगभग 7.5 से 10 प्रतिशत हिस्सा अवैध कमीशन के रूप में वसूला जाता था, जिससे करीब 1,020 करोड़ रुपये का नाजायज फायदा उठाया गया। वर्ष 2021 से 2025 के बीच हुए इन सरकारी अनुबंधों में गड़बड़ी की प्राथमिक जांच के बाद यह मामला दर्ज किया गया है।
रिश्वत वितरण में भाइयों और सहयोगियों की भूमिका
दस्तावेजों में स्पष्ट किया गया है कि केएन नेहरू इस पूरे तंत्र के मुख्य सूत्रधार थे। उनके भाई के.एन. मणिवन्नन और एन. रविचंद्रन अवैध राशि के संकलन व वितरण का काम संभाल रहे थे। इसके अलावा, उनके निकटवर्ती सहयोगी कवि प्रसाद के माध्यम से ठेकेदारों से धन एकत्र किया जाता था। जांच में अविनासी और तिरुप्पुर की कुछ निजी फर्मों का भी उल्लेख है, जिन्होंने इस नेटवर्क को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए।
नगर निगम अधिकारियों और निर्माण कंपनियों पर भी गाज
इस व्यापक घोटाले में कोयंबटूर के नगर नियोजन अधिकारी तथा तिरुप्पुर के क्षेत्रीय अभियंताओं पर भी नियमों को ताक पर रखकर अनुचित लाभ पहुंचाने और घूस लेने के आरोप लगे हैं। इसके साथ ही चेन्नई स्थित एक नामी कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिकों, पदाधिकारियों और कई अज्ञात सरकारी कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
व्हाट्सएप चैट और डिजिटल साक्ष्यों से खुला राज
यह पूरी कानूनी कार्रवाई सितंबर 2021 में सुदर्शनम, एबेनेजर और प्रसाद के बीच हुई व्हाट्सएप बातचीत के आधार पर आगे बढ़ी है। जांच के दौरान आरोपी मणिवन्नन के मोबाइल फोन से संदिग्ध लेनदेन की डिजिटल रसीदें और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनसे इस विशाल वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है।

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