September 7, 2026

मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद निकला कुआं, कितना पुराना है? अब ASI करेगी पड़ताल

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान एक प्राचीन कुआं मिलने से प्रशासनिक गलियारों और स्थानीय स्तर पर खलबली मच गई है। शनिवार को जिला प्रशासन द्वारा अवैध ढांचा हटाने की कार्रवाई के उपरांत जब रविवार तड़के पोकलैंड मशीन की मदद से एक कंक्रीट स्लैब को हटाया गया, तो उसके ठीक नीचे करीब पांच फीट व्यास और 20 से 22 फीट गहराई वाला एक कुआं दिखाई दिया। कुएं के मिलने के बाद अब इसके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को लेकर विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

लखौरी ईंटों से निर्मित कुएं का इतिहास और एएसआई सर्वे

कुएं का निर्माण प्राचीन लखौरी ईंटों का उपयोग करके किया गया है। इतिहासकारों के अनुसार, उत्तर भारत में मुगलकाल के दौरान 17वीं से 18वीं शताब्दी के मध्य और लगभग 1850 तक के निर्माण कार्यों में चूने व गारे के साथ लखौरी ईंटों का बहुतायत से प्रयोग किया जाता था। कुएं का वास्तविक इतिहास जानने के लिए जिला प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से संपर्क किया है। माना जा रहा है कि एएसआई की विशेष टीम जल्द ही मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक सर्वे कर सकती है। इसके साथ ही राजस्व विभाग खसरा-खतौनी और पुराने भू-अभिलेखों की जांच कर रहा है।

प्रशासनिक कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय दावे

इससे पूर्व शनिवार को जिला प्रशासन ने सात बुलडोजर और 12 डंपर लगाकर लगभग पांच घंटे चले अभियान में 315 वर्ग मीटर में बनी दो मंजिला विवादित मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर कलक्ट्रेट के सभी प्रवेश द्वारों को बंद कर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। वहीं कुआं मिलने के बाद बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने दावा किया है कि भारतीय परंपरा में कुआं पूजनीय स्थल से जुड़ा होता है, इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यहां पूर्व में कोई पूजित देवस्थान मौजूद था। एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि बेदखली के बाद मलबा हटाने के दौरान कुआं मिला है और एएसआई जांच के बाद ही इसकी प्राचीनता का सटीक पता चल सकेगा।