September 4, 2026

शिक्षा के मुद्दे पर कमलनाथ ने घेरा मोहन सरकार को, लगाए गंभीर आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते ड्रॉपआउट दर को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश सरकार को 'शिक्षा विरोधी' करार देते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक कुप्रबंधन और कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज करने की नीति के कारण लाखों बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो रहे हैं। इसका सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है।

दो वर्षों में लाखों बच्चे ड्रॉपआउट की स्थिति में

कमलनाथ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर लगातार चिंताजनक बनी हुई है:

  • सत्र 2025-26: लगभग 15.25 लाख बच्चे ऐसे रहे, जो पूर्व विद्यालय से निकलने के बाद अगली कक्षा के लिए किसी अन्य विद्यालय में दाखिला नहीं ले सके।

  • मौजूदा सत्र (30 अगस्त तक): 11.12 लाख बच्चे ड्रॉपआउट श्रेणी में दर्ज किए जा चुके हैं (यद्यपि 30 सितंबर तक प्रोविजनल नामांकन प्रक्रिया जारी रहने से आंकड़ों में संशोधन संभव है)।

स्कूलों के संविलियन और दूरी से बढ़ी मुश्किलें

कांग्रेस नेता के अनुसार, कम नामांकन का हवाला देकर प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों को बंद करने या दूरस्थ स्कूलों में मर्ज करने से बच्चों के सामने गंभीर भौगोलिक बाधाएं उत्पन्न हुई हैं। कई क्षेत्रों में विद्यालयों की दूरी 1 से 5 किलोमीटर तक बढ़ गई है। इसके परिणामस्वरूप निर्धन परिवारों के सामने दैनिक आवागमन, परिवहन व्यय और विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं, जिससे ड्रॉपआउट को बढ़ावा मिल रहा है।

राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे मध्य प्रदेश की रिटेंशन दर

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आंकड़ों के आधार पर स्कूली शिक्षा की स्थिति रेखांकित की गई:

  • 12वीं तक रिटेंशन दर: मध्य प्रदेश में कक्षा 1 से 12वीं तक की रिटेंशन दर मात्र 37.3 प्रतिशत है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 51.9 प्रतिशत है। इसका तात्पर्य यह है कि कक्षा 1 में प्रवेश लेने वाले करीब 62.7 प्रतिशत विद्यार्थी 12वीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं।

  • हाईस्कूल ड्रॉपआउट में उछाल: सत्र 2024-25 में जहां हाईस्कूल स्तर पर ड्रॉपआउट दर 8.2 प्रतिशत थी, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 13 प्रतिशत हो गई (छात्रों में 14.7 प्रतिशत और छात्राओं में 11.3 प्रतिशत)।

सरकारी शिक्षा तंत्र को कमजोर करने का आरोप

कमलनाथ ने दावा किया कि देशभर में बंद या मर्ज किए जा रहे विद्यालयों में मध्य प्रदेश का अनुपात आधे से अधिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ करने के स्थान पर सार्वजनिक शिक्षा ढांचे को समाप्त करने की दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत होती है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार अपनी मर्जर नीति की समीक्षा करे और हर बच्चे की सुलभ शिक्षा सुनिश्चित करे।