भरतपुर. राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में एक ओर जहाँ टिकट हासिल करने के लिए खींचतान मची हुई है और प्रत्याशी न बनाए जाने से नाराज नेता बगावत पर उतर आए हैं, वहीं भरतपुर में एक अनूठा मामला सामने आया है। यहाँ वार्ड संख्या 19 से मनोज सिंह नामक प्रत्याशी को भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस—दोनों ही प्रमुख सियासी दलों ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद यह वाकया पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेसी पृष्ठभूमि के नेता को भाजपा ने भी बनाया प्रत्याशी
मनोज सिंह भरतपुर के वार्ड 19 से आने वाले स्थानीय नेता हैं और लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी में विभिन्न पदों पर सक्रिय रहे हैं। वह इससे पूर्व दो बार पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं। इस बार निकाय चुनाव में कांग्रेस ने अपने पुराने नेता पर दांव खेलते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया, लेकिन इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की अधिकृत सूची में भी प्रत्याशी के रूप में उन्हीं के नाम की घोषणा कर दी गई।
दोनों दलों से दावेदारी के बीच भाजपा के साथ जाने का निर्णय
स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, मनोज सिंह ने निकाय चुनाव के लिए दोनों ही दलों की स्क्रीनिंग प्रक्रियाओं में भाग लिया था और आवेदन किया था। दोनों मुख्य दलों की ओर से सिंबल जारी होने के बाद मनोज सिंह ने स्थिति साफ करते हुए भारतीय जनता पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।
कांग्रेस का कार्रवाई का रुख, वार्ड में चुनावी सरगर्मी तेज
एक ही प्रत्याशी को दोनों दलों द्वारा मैदान में उतारे जाने के इस घटनाक्रम को कांग्रेस पार्टी ने अपने साथ हुआ विश्वासघात करार दिया है। कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने मनोज सिंह को पार्टी से निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक ही उम्मीदवार को दो विरोधी दलों का समर्थन मिलने से वार्ड 19 का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

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