नई दिल्ली। देश में टैक्स नियमों का पालन करने वाले नागरिकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आकलन वर्ष 2026-27 के तहत 31 अगस्त 2026 की समयसीमा खत्म होने तक 7.8 करोड़ से ज्यादा लोग अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर चुके हैं। टैक्स विभाग के अनुसार, इस बार करदाताओं ने पुराने सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं, जिससे सरकारी खजाने में राजस्व बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है।
पिछले साल (आकलन वर्ष 2025-26) में सरकार ने जब तारीख बढ़ाकर 16 सितंबर की थी, तब जाकर करीब 7.3 करोड़ रिटर्न जमा हो पाए थे। वहीं इस बार बिना किसी तारीख बढ़ाए सामान्य डेडलाइन के भीतर ही यह बड़ा लक्ष्य पार कर लिया गया, जो टैक्सपेयर्स की तत्परता को दर्शाता है।
वेतनभोगी और गैर-ऑडिट कारोबारियों की बड़ी भागीदारी
इस रिकॉर्ड आंकड़े में सबसे बड़ा हिस्सा नौकरीपेशा और सामान्य आय वर्ग का है। 31 जुलाई की पहली डेडलाइन तक 5.9 करोड़ से अधिक ITR-1 और ITR-2 फॉर्म जमा हुए थे। इसके बाद 31 अगस्त तक उन प्रोफेशनल्स और छोटे व्यापारियों ने अपने फॉर्म भरे, जिन्हें अपने खातों की कानूनी जांच (ऑडिट) कराने की जरूरत नहीं होती।
बिना ऑडिट वाले करदाता किन फॉर्म्स का करते हैं चुनाव?
जिन करदाताओं पर ऑडिट का नियम लागू नहीं होता, वे अपनी कमाई के जरिए के मुताबिक फॉर्म चुनते हैं:
-
ITR-3: यह फॉर्म उन व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जो खुद का व्यापार या स्वतंत्र पेशा चलाते हैं।
-
अन्य विकल्प: इस श्रेणी में आय के स्वरूप के आधार पर ITR-4, 5 या 7 का भी उपयोग किया जाता है।
संस्थाओं और कंपनियों के लिए तय किए गए फॉर्म
विभाग ने अलग-अलग संस्थाओं के लिए फॉर्म का दायरा स्पष्ट रखा है:
-
ITR-4 (सुगम): छोटे व्यापारियों और मध्यम आय वर्ग के पेशेवरों के लिए सबसे आसान फॉर्म।
-
ITR-5: पार्टनरशिप फर्म, सहकारी समितियां और सीमित देयता भागीदारी (LLP) इस फॉर्म को भरती हैं।
-
ITR-6: सभी रजिस्टर्ड कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए यह फॉर्म भरना जरूरी है।
-
ITR-7: ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान और धर्मार्थ संगठन अपने वित्तीय लेन-देन का ब्योरा देने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

More Stories
MSCI रीबैलेंसिंग और नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम आमने-सामने, आज बाजार पर रहेगी नजर
दुनिया में संकट, फिर भी भारत की रफ्तार बरकरार; सीतारमण ने गिनाईं आर्थिक मजबूती की वजहें
इंडिगो वेंचर्स का एआई कंपनी सर्वम में रणनीतिक निवेश, परिचालन दक्षता पर जोर