August 27, 2026

अखिलेश-संजय की मुलाकात के बाद गरमाई यूपी की राजनीति, कांग्रेस के सामने नई चुनौती

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सभी राजनीतिक दल अपने पुराने और नए सहयोगियों के साथ मुलाकातों का दौर चला रहे हैं, जिसमें नए सियासी समीकरणों पर मंथन किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद संजय सिंह की हालिया मुलाकात ने सूबे की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस मुलाकात के बाद से विपक्षी खेमे में विशेषकर कांग्रेस पार्टी काफी सतर्क नजर आ रही है, और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक रणनीतिक बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है।

कांग्रेस की चिंता और वोटों के बिखराव का डर

सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, कांग्रेस की मुख्य चिंता यह है कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राजनीतिक तालमेल होने पर विपक्षी वोटों का विभाजन हो सकता है। कांग्रेस पहले भी यह आरोप लगाती रही है कि आम आदमी पार्टी कई राज्यों में चुनाव लड़कर विपक्षी वोटों को विभाजित करती है, जिसका सीधा राजनीतिक लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलता है।

पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियां भी बनी हैं वजह

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच संबंधों में सबसे बड़ा गतिरोध पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को लेकर है। वर्तमान में पंजाब में आम आदमी पार्टी सत्ता में है, जबकि कांग्रेस वहां प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पंजाब में आम आदमी पार्टी के खिलाफ अपनी मुखर राजनीतिक लड़ाई को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं करना चाहती है। इसके अलावा, पंजाब और उत्तर प्रदेश दोनों ही राज्यों में चुनावी सरगर्मी एक ही समय पर परवान चढ़ सकती है।

पहले भी अलग-अलग रही हैं राजनीतिक राहें

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) का हिस्सा जरूर रही थी, लेकिन बाद में हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे पर सहमति न बन पाने के कारण आम आदमी पार्टी ने इस गठबंधन से दूरी बना ली थी। इसके बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने एक-दूसरे के आमने-सामने चुनाव लड़ा था, जिस दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली थी।

क्या समाजवादी पार्टी बनाए रखेगी दूरी?

कांग्रेस पार्टी को यह उम्मीद है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी बड़े चुनावी समझौते से परहेज करेंगे। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी का कोई बहुत बड़ा जनाधार नहीं है, जबकि समाजवादी पार्टी के लिए कांग्रेस एक मजबूत और विश्वसनीय सहयोगी साबित हो सकती है।

फिलहाल, अखिलेश यादव और संजय सिंह की इस मुलाकात पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—तीनों ही दलों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, इस एक मुलाकात ने विपक्षी गठबंधन के भीतर भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए कयासों का बाजार गर्म कर दिया है।