August 21, 2026

अब जमीन नहीं, आसमान की ओर बढ़ेगी दिल्ली; इमारतों की ऊंचाई को लेकर बड़ा फैसला

नई दिल्ली: सीमित भूमि और लगातार बढ़ती आबादी के बीच देश की राजधानी दिल्ली के विकास का प्रारूप पूरी तरह बदलने जा रहा है। अब शहर का विस्तार जमीन पर क्षैतिज (Horizontal) रूप से होने के बजाय ऊंचाई (Vertical) की दिशा में होगा। प्रस्तावित 'मास्टर प्लान-2047' के तहत दिल्ली में हाइराइज इमारतों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है। आने वाले समय में इस बदलाव से दिल्ली की पहचान पारंपरिक कम ऊंची इमारतों वाले शहर से बदलकर एक आधुनिक गगनचुंबी इमारतों (Skyscrapers) वाले महानगर के रूप में हो सकती है।

ऊंचाई की सीमा संबंधी पुराने प्रावधान समाप्त

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने जानकारी दी है कि लुटियंस बंगला जोन, एयरपोर्ट क्षेत्र और अत्यधिक सघन बसावट वाले कुछ विशेष हिस्सों को छोड़कर शहर के बाकी सभी हिस्सों में स्वेच्छा से कितनी भी ऊंचाई की इमारतें बनाई जा सकेंगी। नए मास्टर प्लान में पूर्व में ऊंचाई की सीमा तय करने वाले प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया है, बशर्ते तय एफएआर (FAR) और मौके पर जरूरी बुनियादी संरचनाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाए।

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 के पास बनेगा पहला हाई डेंसिटी कॉरिडोर

शहर के इस नए विकास मॉडल का खाका 'अर्बन एक्सटेंशन रोड-2' (UER-2) के आसपास पेश किया गया है। जमीन पर उतरने के बाद यह दिल्ली का पहला ऐसा इलाका बन सकता है जहाँ इस आधुनिक मॉडल पर विकास होगा। अलीपुर से शुरू होकर बवाना, रोहिणी, नजफगढ़ और द्वारका होते हुए महिपालपुर तक जाने वाली इस सड़क के दोनों तरफ करीब 250 मीटर के दायरे में हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसके चलते कम भूमि पर अधिक आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं:

  • 3.2 करोड़ अनुमानित आबादी के लिए तैयारी: वर्ष 2047 तक दिल्ली की अनुमानित 3.2 करोड़ की आबादी और आवास की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए जमीन घेरने के बजाय ऊंची इमारतों के जरिए अधिक लोगों के रहने और काम करने की व्यवस्था की जा रही है। इससे खुली जमीन, सड़कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए पर्याप्त जगह बच सकेगी।

  • सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन: हाईराइज विकास के तहत 100 मंजिल से अधिक ऊंची इमारतें भी बनाई जा सकेंगी। इसके लिए जमीन मालिकों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसके तहत बड़े भूखंड का एक हिस्सा सड़क, पार्क जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए देने पर बची हुई जमीन पर अधिक निर्माण की अनुमति मिलेगी।

  • छोटे और किफायती आवास: ऊंची इमारतों में केवल महंगे फ्लैट ही न बनें, इसके लिए कुल फ्लोर एरिया का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा छोटे घरों (कारपेट एरिया 60 वर्गमीटर से कम) के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है, ताकि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को भी आवास मिल सके।

  • सार्वजनिक परिवहन से कनेक्टिविटी: इन गगनचुंबी इमारतों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के लिए स्काईवॉक, डेडीकेटेड पैदल मार्ग या भूमिगत रास्ते बनाए जाएंगे ताकि लोग निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करें।

  • पर्यावरण और सुरक्षा मानक: इमारतों की अधिकतम ऊंचाई की कोई निश्चित सीमा नहीं होगी, बल्कि यह एयरपोर्ट अथॉरिटी, दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की क्लीयरेंस पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही प्रत्येक परियोजना में कम से कम 15 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली और पर्याप्त पार्किंग का होना अनिवार्य होगा।

सघन बसावट वाले इलाकों का होगा पुनर्विकास

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, दिल्ली के कई इलाके बेहद सघन रूप से बसे हुए हैं। इन क्षेत्रों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए भी मास्टर प्लान में विशेष प्रावधान किए गए हैं। यह कार्य स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए (RWA) की आपसी सहमति से ही होगा। सरकार आरडब्ल्यूए के साथ मिलकर 'इन-सीटू डेवलपमेंट' (In-Situ Development) मॉडल के आधार पर इन पुराने इलाकों का सुव्यवस्थित पुनर्विकास करेगी।